ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News AstrologyRath Saptami Kab Hai date time puja vidhi shubh muhrat vrat katha importance significance

Rath Saptami 2024: रथ सप्तमी आज, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और मान्यता

Rath Saptami : माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत 19 फरवरी (शुक्रवार) को रखा जाएगा। मत्स्य पुराण के अनुसार, यह व्रत पूरी तरह से सूर्य देव को समर्पित है।

Rath Saptami 2024: रथ सप्तमी आज, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और मान्यता
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीFri, 16 Feb 2024 06:09 AM
ऐप पर पढ़ें

Rath Saptami 2024 : माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत 16 फरवरी (शुक्रवार) को रखा जाएगा। मान्यता है कि रथ सप्तमी के दिन सूर्योदय के समय पवित्र नदी या कुंड में स्नान करने से बीमारियों से मुक्ति मिलती है। अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि इस व्रत को आरोग्य सप्तमी के नाम से भी जानते हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार, यह व्रत पूरी तरह से सूर्य देव को समर्पित है। कहते हैं कि इस दिन स्नान, दान और पूजा का कई हजार गुना फल मिलता है।

रथ सप्तमी शुभ मुहूर्त-

  • सप्तमी तिथि प्रारम्भ - फरवरी 15, 2024 को 10:12 ए एम बजे
  • सप्तमी तिथि समाप्त - फरवरी 16, 2024 को 08:54 ए एम बजे
  • रथ सप्तमी के दिन अरुणोदय - 06:36 ए एम
  • रथ सप्तमी के दिन अवलोकनीय सूर्योदय - 06:58 ए एम
  • रथ सप्तमी के दिन स्नान मूहूर्त - 05:18 ए एम से 06:58 ए एम
  • अवधि - 01 घण्टा 41 मिनट्स

Horoscope : मेष, मिथुन, सिंह कन्या वालों के शुरू हुए अच्छे दिन, 3 राजयोग चमकाएंगे भाग्य, मां लक्ष्मी की कृपा से होगा धन-लाभ

घरों में बनाते हैं रंगोली-

रथ सप्तमी के दिन महिलाएं घरों में सूर्य देव का स्वागत करने के लिए उनका या उनके रथ का चित्र बनाती हैं। इसके साथ ही घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाती हैं। आंगन में मिट्टी के बर्तन में दूध रखा जाता है और सूर्य देव की गर्मी से इसे उबाला जाता है। इसके बाद दूध का इस्तेमाल सूर्य भगवान के लिए भोग बनाने में किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सूर्य देव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे। इस वजह से यह तिथि सूर्य देव के जन्मोत्सव या सूर्य जयंती के रूप में प्रचलित है। 

Mahashivratri 2024 : महाशिवरात्रि कब है? नोट कर लें डेट, शुभ मुहर्त, पूजा- विधि, महत्व और शिव पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट

अचला सप्तमी को लेकर प्रचलित कथा-

अचला सप्तमी की एक कथा के अनुसार, एक गणिका इन्दुमती ने वशिष्ठ मुनि के पास जाकर मुक्ति पाने का उपाय पूछा। मुनि ने कहा, ‘माघ मास की सप्तमी को अचला सप्तमी का व्रत करो।' गणिका ने मुनि के बताए अनुसार व्रत किया। इससे मिले पुण्य से जब उसने देह त्यागी, तब उसे इन्द्र ने अप्सराओं की नायिका बना दिया। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और सौष्ठव पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। शाम्ब ने अपने इसी अभिमानवश होकर दुर्वासा ऋषि का अपमान कर दिया। दुर्वासा ऋषि को शाम्ब की धृष्ठता के कारण क्रोध आ गया, जिसके पश्चात उन्होंने को शाम्ब को कुष्ठ हो जाने का श्राप दे दिया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र शाम्ब से भगवान सूर्य नारायण की उपासना करने के लिए कहा। शाम्ब ने भगवान कृष्ण की आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना करनी आरम्भ कर दी। जिसके फलस्वरूप सूर्य नारायण की कृपा से उन्हें अपने कुष्ठ रोग से मुक्ति प्राप्त हो गई।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें