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रंगभरी एकादशी 2019 : आज खेलते हैं भभूत की होली, जानिए इसकी 3 खास बातें

rangbhari ekadashi 2019

होली का त्योहार फाल्गुन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसे पहले आने वाली एकादशी को रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। इस उत्सव का बहुत महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मां पार्वती से विवाह के बाद फाल्गुन शुक्लपक्ष की एकादशी पर गौना लेकर काशी आए थे। इस मौके पर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में बड़ा आयोजन होता है। आइए जानते हैं इसकी खास बातें

भभूत की होली 
मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ खुद भक्तों के साथ होली खेलते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में आज के दिन रजत पालकी में राजशाही पगड़ी बांधे बाबा विश्वनाथ की बारात सजती है। उनके साथ गौरी जी को भी सजाया जाता है और उनके साथ बालरूप गणेश भी रहते हैं। इसी दौरान शिवभक्त भभूत की होली खेलते हैं। इसके बाद शोभायात्रा निकलती है। शोभायात्रा के बाद जब प्रतिमाएं वापस पहुंचती हैं, तो उन्हें गर्भगृह में स्थापित किया जाता है और विशेष आरती की जाती है।

आमलकी एकादशी
रंगभरी एकादशी को आंवला एकादशी भी कहते हैं। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है और अन्नपूर्णा की स्वर्ण या चांदी की मूर्ति के दर्शन की मान्यता है। कहा जाता है कि आंवला की उत्पत्ति भगवान विष्णु द्वारा हुई थी। 

व्रत विधि 
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। तैयार होकर भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। व्रत करने वाले एक समय फलाहार कर सकते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा करने के बाद किसी ब्राह्मण को भोजन करवाएं और दान करें।

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