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Ramnavami 2019: अयोध्या के कण कण में समाया है भगवान राम का नाम

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वाल्मीकि रामायण में वर्णन है कि ‘मनुना मानवेन्द्रेण सा पुरी निर्मिता स्वयं’अर्थात् मनुष्यों के इन्द्र मनु महाराज ने अयोध्या को बसाया। स्कन्द पुराण के अनुसार ‘अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या’अर्थात देवताओं की ओर से पूजित अयोध्या में आठ चक्र व नवद्वार हैं। ‘अयोध्या’ का रहस्य  उद्घाटित करते हुए गया  कि ‘अकारो ब्रह्म च प्रोक्तं यकारो विष्णुरुच्यते, धकारो रुद्ररुपश्च अयोध्या नाम राजते’ अर्थरत अ कार ब्रह्मा है और य कार विष्णु तथा ध कार शिवरुप है। इस प्रकार अयोध्या के नाम में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का निवास है। इसी अयोध्या में भगवान विष्णु के अवतारी पुरुष रूप में भगवान राम का प्राकट्य ‘नौमी तिथि मधुमास पुनीता’ के पावन पर्व पर हुआ था।

विडम्बना यह है कि इस वर्ष रामनवमी दो दिन मनाई जा रही है। वैष्णव विरक्त संत समाज जहां अष्टमी भेदी नवमी का निषेध करते हुए 14 अप्रैल रविवार को
भगवान का जन्मोत्सव मनाने की तैयारी में है। वहीं वैष्णव परम्परा के गृहस्थ जन 13 अप्रैल तदनुसार शनिवार को मध्याह्न में नवमी तिथि के साथ पुनर्वसु नक्षत्र मिलने के कारण भगवान का जन्म मनाएंगे। फिलहाल रामलला के उत्सव के साक्षी बनने के लिए यहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच चुकी है और अभी उनका आगमन लगातार हो रहा है।  यह श्रद्धालु विभिन्न जातियों-उपजातियों एवं राजे-रजवाडों के मंदिरों के अलावा अपने-अपने गरुधामों में ठहर कर धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होते हैं।

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अमावांराज मंदिर ट्रस्ट के सचिव एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल कहते हैं अयोध्या भगवान राम की क्रीडा भूमि रही है। यहां का कण-कण उनकी स्मृति से अनुप्राणित है।  वह कहते हैं कि यही कारण रहा कि आक्रान्तों के कालखंड में भी श्रद्धालुगण यहां आते थे और भूमि को नमन करते थे। उन्होंने बताया कि इसका उल्लेख स्वयं औरंगजेब के सिपहसालार ने औरंगजेब नामा में किया है। वैज्ञानिक मान्यता के विपरीत संतो ने भगवान राम का जन्म करीब-करीब नौ लाख वर्ष पूर्व माना है। वह कहते हैं कि वैज्ञानिक मान्यताएं अनेक बार खंडित होती रही है लेकिन  वेद-शास्त्रों पर आधारित मान्यता अखंड  है। इस बहस के बावजूद अयोध्या की चौरासी कोस की सांस्कृतिक सीमा में रामायणकालीन अनेक तीर्थ विद्यमान है। यद्यपि कि यह तीर्थ उपेक्षा के कारण वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण हो गए है। फिर भी  अलग-अलग तिथियों में इनकी परिक्रमा का विधान है।

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मंदिरों में गर्भगृह की परिक्रमा के अतिरिक्त प्रत्येक माह की एकादशी के पर्व पर साधक गण अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा करते हैं। कार्तिक शुक्ल नवमी को अयोध्या की 14 कोसी परिक्रमा में लाखों श्रद्धालुगण शामिल होते हैं तो कार्तिक शुक्ल एकादशी  के पर्व पर परम्परागत पंचकोसी परिक्रमा में भी लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहती है। इसी तरह  रामनगरी के 84 कोसी परिक्रमा का श्रीगणेश बैसाख कृष्ण प्रतिपदा से  होता है। करीब 23 दिनों तक चलने वाली यह परिक्रमा बस्ती जनपद  में स्थित पुत्रेष्ठि यज्ञ स्थल मखभूमि से  प्रारम्भ होकर जानकी नवमी के पर्व पर अयोध्या के सीताकुंड में पूर्ण होती है।

 

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  • Web Title:Ramnavami 2019: Ram name is everywhere in Ayodhya
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