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2 अगस्त, 2020|4:58|IST

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Ayodhya Ram Mandir: 8000 पवित्र स्थलों के मिट्टी-जल से होगा राम मंदिर भूमि पूजन

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन में देशभर के करीब आठ हजार पवित्र स्थलों के मिट्टी और जल का उपयोग किया जाएगा। कार्यक्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि सामाजिक समरसता का संदेश देने के लिए मिट्टी-जल का संग्रह किया जा रहा है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने कहा-दो दिन पहले तक करीब 3,000 स्थानों से मिट्टी और जल अयोध्या पहुंच चुका है, यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने का अनूठा उदाहरण है।

जनजातीय समाज उत्साहित- 
चौपाल ने कहा-झारखंड में सरना स्थल जनजातीय समाज का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है, जब हम उस स्थान की मिट्टी एकत्र करने गए तो दलित-जनजातीय समाज में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल देखने को मिला। जनजातियों का कहना था कि राम-सीता तो हमारे हैं, तभी हमारी माता शबरी की कुटिया में पधारे और जूठे बेर खाए।

भगवान राम समरसता की मिसाल: विहिप 
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा-भगवान राम द्वारा अहिल्या का उद्धार, शबरी और निषादराज से मित्रता सामाजिक समरसता के अनुपम उदाहरण हैं, भगवान राम ने सामाजिक समरसता और सशक्तीकरण का संदेश स्वयं के जीवन से दिया, इसलिए उनके मंदिर निर्माण के भूमि पूजन में देशभर की पवित्र नदियों के जल और तीर्थ स्थानों की मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। 

आंबेडकर-रविदास की जन्मस्थली से आएगी मिट्टी-
विहिप सूत्रों ने बताया कि काशी स्थित संत रविदास जन्मस्थली, बाबासाहेब आंबेडकर के जन्मस्थान महू, बिहार के सीतामढ़ी स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम, महाराष्ट्र में विदर्भ के गोंदिया जिला के कचारगड, झारखंड के रामरेखाधाम, दिल्ली के जैन मंदिर और वाल्मीकि मंदिर जैसे स्थलों से मिट्टी-जल एकत्र किया जा रहा है।  

त्रिवेणी के पावन संगम का जल लाया गया-
इसके साथ गंगासागर और प्रयागराज स्थित त्रिवेणी के पावन संगम के जल और मिट्टी का भी भूमि पूजन में उपयोग किया जाएगा। बिहार की फल्गु नदी से बालू और रेत भी अयोध्या भेजी जा रही है। गया धाम स्थित यह नदी पवित्र पितृ-तीर्थ है। इसके अलावा पावापुरी स्थित जलमंदिर, कमल सरोवर, प्रचीन पुष्करणी तालाब और सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य से जुड़े भोरा तालाब का भी जल लाया जाएगा। 

मंदराचल पर्वत की मिट्टी भेजी गई-
भूमि पूजन के लिए मंदराचल पर्वत की मिट्टी भी भेजी गई है। पौराणिक मान्यता है कि इसी पर्वत से समुद्र मंथन किया गया था। राजीगर की पंच वादियों की मिट्टी और जल भी भेजा जा रहा है।

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  • Web Title:Ram Mandir Bhoomi Pujan will be done from soil and water of 8000 holy places