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Raksha Bandhan 2019 : राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, राखी मंत्र समेत 10 खास बातें

RAKHI CRIME

Raksha Bandhan 2019 : आज रक्षाबंधन है। सावन शुक्ल पूर्णिमा पर बन रहा संयोग भाई-बहन के प्यार की डोर को और मजबूत कर रहा है। श्रवणा नक्षत्र में मनाए जाने से राखी का महत्व बढ़ गया है। भद्रा का साया नहीं है जिससे पूरे दिन राखी बांधी जा सकेगी। ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि कई वर्षों के बाद ऐसा संयोग बन रहा है जिससे भाई और बहन का रिश्ता अटूट होगा। ज्योतिष विद्वान पंडित राकेश झा शास्त्री का कहना है कि ऐसा संयोग बहुत कम बनता है जब भद्रा से राखी मुक्त हुई है। उत्तम संयोग में राखी बांधने से ऐश्वर्य तथा सौभाग्य की वृद्धि होती है। यहां पढ़ें इस रक्षाबंधन से जुड़ी 10 खास बातें 

1. उदया तिथि में शुभ योग और गुरुवार का महत्व
उदया तिथि की पूर्णिमा गुरुवार को है और इस तिथि पर राखी काफी शुभ है। यह गुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार गुरु बृहस्पति ने देवराज इंद्र को दानवों पर विजय प्राप्ति के लिए इंद्र की पत्नी से रक्षासूत्र बांधने के लिए कहा था जिसके बाद देवराज इन्द्र ने विजय प्राप्ति की थी। राखी गुरुवार को होने से इसकी महत्ता काफी बढ़ गई है। रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा भद्रा और ग्रहण से मुक्त ही मनाया जाता है। शास्त्रों में भद्रा रहित काल में ही राखी बांधने का प्रचलन है। भद्रा रहित काल में राखी बांधने से सौभाग्य में बढ़ोत्तरी होती है।.

2. सिद्ध योग: प्रात: 7:35 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक.
विशिष्ट शुभ मुहूर्त- सुबह 09:18 से 10:55 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से 12:57 बजे तक।

3. राखी थाली में रखें ये सामग्री
रोली, कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल), पीली सरसों के बीज, दीपक, राखी, नारियल, मिठाई और भाई के लिए कपड़े या रूमाल रखें.   

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4. पश्चिम दिशा में मुंह करके बंधवाएं राखी 
राखी बंधवाते समय भाई अपना मुंह पश्चिम दिशा में करके बैठें। दरअसल सुबह 05:30 बजे चंद्रमा कुंभ राशि में 3 डिग्री पर होगा और ये सारे दिन उत्तर की तरफ बढ़ेगा। इस स्थिति में अगर आप पश्चिम की ओर बैठेंगे तो सुबह सुबह चन्द्रमा आपके सामने होगा और बाकी दिन ये दाहिनी ओर जाता जायेगा। आपको बता दें कि सामने का और दाहिनी ओर का चन्द्रमा शुभ होता है। अत: राखी बंधवाते समय भाई अगर पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठे तो अच्छा होगा।  

5. राखी बांधने की पूजा विधि
सबसे पहले राखी की थाली सजाएं। इस थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, पीली सरसों के बीज, दीपक और राखी रखें। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी कि राखी बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें, फिर भाई को मिठाई खिलाएं। राखी बांधने के बाद भाइयों को इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार बहनों को भेंट देनी चाहिए। ब्राह्मण या पंडित जी भी अपने यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं। रक्षासूत्र में सरसों, केसर, चंदन, अक्षत और दूब जरूर बांधना चाहिए। रक्षा-सूत्र की पूजा जरूर करनी चाहिए। राखी दायीं  कलाई पर ही बांधनी चाहिए। संभव हो तो रक्षा-सूत्र के बांधने तक भाई और बहन दोनों उपवास रखें। 

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6. राखी बांधते समय इस मंत्र का करें जाप 
ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।

7. 19 साल बाद बन रहा है संयोग
ज्योतिष विद्वान पंडित राकेश झा शास्त्री का कहना है कि सावन शुक्ल पूर्णिमा को भाई बहन का पवित्र त्योहार रक्षा बंधन 15 अगस्त को पड़ रहा है। इसके पूर्व वर्ष 2000 में राखी 15 अगस्त को पड़ी थी। गुरुवार को पड़ने वाला त्योहार श्रवणा नक्षत्र में मनाया जाएगा। सबसे बड़ी बात है कि इस तिथि पर भद्रा नहीं है। बहनों को भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए समय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 

8. अब 2084 में आएगा ऐसा मौका
उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक पं. दिवाकर त्रिपाठी ‘पूर्वांचली के अनुसार रक्षाबधंन 15 अगस्त, गुरुवार को मनाया जाएगा। ऐसा 19 साल बाद हो रहा है। इससे पहले वर्ष 2000 में मंगलवार को इस तरह का योग बना था। इसके बाद वर्ष 2084 में मंगलवार को दोनों पर्व एक साथ मनाए जाएंगे। 

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9. रक्षा बंधन का पौराणिक महत्व
श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पंच पर्व में से एक है। इसका व्रत नहीं होता है। रक्षा बंधन की उत्पत्ति की कथा सतयुग से जुड़ी है। एक समय जब इंद्र युद्ध में दानवों से पराजित होने लगे तो उनकी पत्नी इन्द्राणी ने एक रक्षा सूत्र इंद्र की कलाई पर बांधा था जिससे इंद्र को विजय प्राप्त हुई थी। देवासुर संग्राम में देवी भगवती ने देवताओं के मौली बांधी थी। तभी से रक्षा सूत्र बंधने की यह परंपरा चली आ रही है। कालांतर में यह परंपरा भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के रूप में प्रसिद्ध हुई। 10. राखी बांधने के लिए ये समय उचित
सुबह 6 बजे से 7:30 बजे तक (शुभ)
सुबह 10:48 बजे से दोपहर 12:26 तक (चर)
दोपहर 12:26 से 1:29 बजे तक (लाभ)
दोपहर 3 बजे से 3 :41 बजे तक (अमृत)
शाम 5:19 बजे से 6:57 बजे तक (शुभ)
शाम 6:57 बजे से रात 8:19 बजे तक (अमृत)

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