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पुरुषोत्तम मास शुरू: 13 जून तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य, इस बार हैं दो जेष्ठ

16 मई से 13 जून तक मलमास
16 मई से 13 जून तक मलमास

सनातन धर्मावलंबियों का अति महत्वपूर्ण अधिकमास यानी मलमास जिसे पुरुषोत्तम मास से भी जाना जाता है बुधवार से शुरू हो गया। हर तीन वर्ष पर ज्येष्ठ मास में मलमास लगता है। इस वर्ष 16 मई से 13 जून तक मलमास है। पुरुषोत्तम मास में शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवित आदि नहीं होंगे। इस मास के दौरान शहर सहित पूरे प्रदेश के मंदिरों में जप, तप, तीर्थ, कथा श्रवण आदि के धार्मिक कामकाज होंगे। इस मास में गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि मलमास में धर्म-कर्म करने से वह दस गुना फलदायी होता है। मलमास पड़ने से हिन्दू कैलेंडर में लगभग एक मास की वृद्धि हो जाती है।


इस बार दो ज्येष्ठ मास होंगे 
इस वर्ष मलमास के कारण दो ज्येष्ठ (जेठ) मास होंगे। इसके पहले 2015 में मलमास लगा था, जिससे दो आषाढ़ मास हो गए थे। वहीं 2012 में भी मलमास पड़ा था, जिससे दो भादव पड़ा। ज्योतिषाचार्य प्रियेंदू प्रियदर्शी ने शास्त्रों के हवाले से बताया कि 32 महीने और 16 दिन के बाद मलमास पड़ता है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि  में जाने पर संक्रांति होती है। सौर मास 12 और राशियां भी 12 होती हैं। पर जब दो पक्षों में संक्रांति नहीं होती है तो अधिकमास की स्थिति बनती है। 


भगवान विष्णु का मास है पुरुषोत्तम मास 
आचार्य मार्कण्डेय शारदेय के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु का मास कहा जाता है। उन्होंने इस मास को अपनाया इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता। इस मास को मल महीना भी कहा जाता है। सौर मास 360 दिन का होता है पर एक वर्ष में 365 दिन हो जाते हैं। इस तरह तीन वर्ष पर करीब 15 दिन की वृद्धि हो जाती है। वहीं चंद्रमा सवा दो दिन पर राशि बदलती है। इस तरह उसे सभी 12 राशि से गुजरने में करीब 27 दिन लग जाते हैं। यही 27 दिन मलमास कहलाता है। 

तीन साल में सौर और चंद्रमास का अंतर 33 दिनों का 
तीन साल में सौर और चंद्रमास का अंतर 33 दिनों का 

हर साल सौर मास और चंद्रमास के बीच लगभग 11 दिन का अंतर होता है। तीन साल में इस अंतर का योग 33 दिनों का हो जाता है। यही मल दिन अधिकमास-मलमास कहलाता है। ज्योतिषाचार्य राजनाथ झा ने अनुसार मलमास में पूरे एक माह तक  सूर्य की संक्रांति नहीं पड़ती है। सामान्यत: हर पंद्रह दिन पर एक संक्रांति हो जाती है। संक्रांति नहीं पड़ने से भी मांगलिक कार्य के मुहूर्त नहीं बनते हैं। दो मास तक सूर्य एक ही राशि में रहते हैं। इस दौरान सूर्य वृष राशि में ही दो माह तक रहेंगे। 


मलमास में वर्जित हैं
-शुभ विवाह, मुंडन, यज्ञोपवित, गृहप्रवेश, व्यापार का शुभारंभ । 
क्या करना चाहिए इस मास में :-
विष्णु पूजन, दान-पुण्य, नित्यकर्म, संध्यावंदन, ग्रहशांति, तीर्थ, ग्रहण निमित श्राद्ध, मृत व्यक्ति का पिंडी-सपंडीकरण आदि। 

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  • Web Title:purushottam mas manglik and shubh karya would not to be performed till june 13 due to malamas month