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Pradosh Vrat : फरवरी माह का पहला प्रदोष व्रत कब है ? नोट कर लें सही डेट, शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और महत्व

Pradosh Vrat February 2024 : हिंदू धर्म में हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।

Pradosh Vrat : फरवरी माह का पहला प्रदोष व्रत कब है ? नोट कर लें सही डेट, शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और महत्व
Arti Tripathiलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 05 Feb 2024 05:47 PM
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February 2024 Pradosh Vrat : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को एकदाशी व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-आराधना का विधान है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन शिवजी की विधिवत पूजा करने से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और भोलेनाथ की कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है। आइए जानते हैं फरवरी माह का पहले प्रदोष व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजाविधि ...

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त : पंचांग के अनुसार, फरवरी महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 7 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 2 मिनट पर हो रहा है और 8 फरवरी को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर समाप्त हो रहा है। प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में शिवपूजन का बड़ा महत्व है। इसलिए इस बार 7 फरवरी 2024 को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन बुधवार होने के कारण इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

पूजा का मुहूर्त :  7 फरवरी को शाम 6 बजकर 5 मिनट से 8 बजकर 41 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त बन रहा है। 

प्रदोष व्रत का महत्व : मान्यता है प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की विधिविधान से पूजा करने और व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। प्रदोष व्रत का उपवास रखने से देवों के देव महादेव अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं और अखंड सौभाग्य का वरदान देते हैं। जीवन में चली आ रही सभी परेशानियां से छुटकारा मिलता है और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।

प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री: प्रदोष व्रत में सायंकाल की पूजा के लिए आक के फूल, बेलपत्र, धूप, दीप, रोली, अक्षत, फल, मिठाई और पंचामृत समेत सभी पूजा सामग्री एकत्रित कर लें।

प्रदोष व्रत की पूजाविधि:

प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें। 
स्नानादि के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
शिवजी की प्रतिमा के समझ दीपक जलाएं।
शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
 शिवजी की विधिविधान से पूजा करें।
शिव चालीसा और भोलेनाथ के बीज मंत्रों का जाप करें।
सायंकाल में शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र,धतूरा और आक के फूल अर्पित करें।
इसके बाद सभी देवी-देवताओं के साथ शिवजी की आरती उतारें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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