pradosh vrat 2019 vrat dates vrat vidhi katha - शुक्र प्रदोष व्रत 2019: सुख-शान्ति के लिए रखें ये व्रत, जानें व्रत कथा और महत्व DA Image

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शुक्र प्रदोष व्रत 2019: सुख-शान्ति के लिए रखें ये व्रत, जानें व्रत कथा और महत्व

शिव पार्वती

जो प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है वो शुक्र प्रदोष या भुगुवारा प्रदोष व्रत कहलाता है। इस व्रत को करने से जीवन से नकारात्मकता समाप्त होती है और सफलता मिलती है। साथ ही ये सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन में सुख समृद्धि भर देता है। ये दिन खासतौर से भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। ये व्रत चंद्र मास के 13 वें दिन यानि त्रयोदशी पर होता है। और इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की पूजा का भी विधान है। कहते हैं भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से पाप तो मिटते ही है साथ ही मोक्ष भी प्राप्त होता है। 

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प्रदोष व्रत की कथा

कहा जाता है कि क नगर में तीन मित्र रहते थे। राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकि गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है। धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय कर लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया। ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो ज़िद पर अड़ा रहा और कन्या के माता पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद ति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई।

दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकूओं से पड़ा। जो उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहूंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया जहां उसकी हालत ठीक होती गई। यानि शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए।

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