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20 सितम्बर, 2020|6:26|IST

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Pitrupaksh 2020: इस तारीख को है पूर्णिमा का श्राद्ध, पितरों का तर्पण करने से मिलता है पितरों का आशीर्वाद

pitru paksha 2019

हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष की  शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से होती है और समापन आश्विन की अमावस्या पर होता है। इन 16 दिनों में पितरों का श्राद्ध कर उनका तर्पण किया जाता है। 1 सितंबर को भाद्रपद चतुर्दशी प्रातः 8: 46 बजे तक है, इसके बाद पूर्णिमा तिथि लग रही है। पूर्णिमा तिथि 2 सितंबर को सुबह10:51 तक ही है। दरअसल अलग-अलग जगह श्राद्ध की तिथियों को लेकर मतभेद है। कई जगह उदया तिथि यानी सूर्योदय में तिथि के अनुसार पूर्णिमा तिथि श्राद्ध 2 सितंबर को किया जाएगा। वहीं कुछ पंडितों का मत है कि मध्याह्न समय में (कुतप बेला) पूर्णिमा तिथि होने से पूर्णिमा का श्राद्ध 1 सितंबर को होगा। इस तरह अलग-अलग जगह आप श्राद्ध की तिथियों में अंतर देख सकते हैं। मिथिला पंचांग के अनुसार 3 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो रहा है। आमतौर पर पितृपक्ष खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्रि शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार अधिकमास के कारण श्राद्ध के एक महीने बाद नवरात्र शुरू  होंगे। 

ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार 1 सितंबर को मध्याह्न समय में (कुतप बेला) पूर्णिमा तिथि होने से पूर्णिमा में दिवंगत पूर्वजों का श्राद्ध इसी दिन किया जाएगा। इसका कारण यह है कि आश्विन कृष्ण पक्ष में पूर्णिमा तिथि नही होता है। अतः पूर्णिमा श्राद्ध एक दिन पूर्व ही पूर्णिमा के दिन सम्पन्न किया जाता है। पितृपक्ष 16 दिन का होता है। परन्तु यदि पूर्णिमा श्राद्ध की गणना करें तो यह 17 दिन के रूप में परिगणित हो जाता है।

ज्योतिषाचार्य व राइंका आईडीपीएल के संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि यद्यपि मंगलवार सुबह 9.40 तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। परंतु शास्त्रों के अनुसार पितरों का तर्पण उदय व्यापिनी तिथि में नहीं अपितु उत्तरार्ध तिथि में किए जाने का विधान है। इसलिए मंगलवार पूर्णमासी को पितरों के लिए उनके वंशजों द्वारा तर्पण किया जाना शास्त्र सम्मत है। ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार इसमे प्रथम तिथि प्रतिपदा और अन्तिम तिथि अमावस्या होती है। शास्त्रों मे तीन प्रकार के ॠण बताए गए हैं, देवॠण, ॠषि ॠण  और पितृॠण। धर्मशास्त्र के अनुसार पितृपक्ष मे हमारे पितरों का पृथ्वी पर अवतरण होता है। उनके अवतरण पर उनके वंशज उन्हे तृप्त करने के लिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जो कुछ भी श्रद्धा से अर्पण  करते है, उसे उनके पूर्वज स्वीकार कर लेते हैं। यह कार्य सनातन धर्म की परम्परा मे आश्विन कृष्ण पक्ष (पितृ पक्ष ) में किया जाता है। इस पितृपक्ष को महालय भी कहा जाता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार जो वस्तु उचित काल या स्थान पर पितरों के नाम पर उचित विधि से दिया जाता है, वह श्राद्ध कहलाता है। श्राद्ध के माध्यम से पितर तृप्त होते हैं। पिण्डदान श्राद्ध का अभिन्न अंग होता है। पितरोंस के अप्रसन्न होने से अनेक बाधाएं समुपस्थित होती है। यह अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए श्राद्ध अवश्य किया जाए।

ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार पहली सितम्बर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा। क्योंकि चतुर्दशी तिथि 1 सिंतबर दिन मंगलवार को दिन में 8:46 बजे तक व्याप्त रहेगी। तत्पश्चात पूर्णिमा तिथि लग जाएगी जो 2 सितंबर दिन बुधवार को दिन में 9:34 बजे तक व्याप्त होगी। इस प्रकार दोपहर की पूर्णिमा 1 सितंबर को ही प्राप्त होगी। इसी कारण पूर्णिमा का श्राद्ध 1 सितंबर को ही होगा।  

श्राद्ध में मुख्यतः देय पदार्थ :

श्राद्ध मे तिल, जौ,चावल का अधिक महत्व है। कुश और कुतप बेला का भी महत्व सर्वाधिक माना गया है। पुराणों के अनुसार श्राद्ध करने का अधिकार सुयोग्य पुत्र को है, इसके अतिरिक्त पौत्र, भातृ, भतीजा या परिवार के किसी सदस्य अथवा इनके अनुपस्थित मे स्त्रियो को भी श्राद्ध करने का अधिकार है।

श्राद्ध तालिका :

 पूर्णिमा श्राद्ध 1 सितंबर को
प्रतिपदा श्राद्ध 2 सितम्बर को।
द्वितीया श्राद 3 सितम्बर को।
तृतीया श्राद्ध 4सितम्बर को।
5 सितम्बर को किसी तिथि के श्राद्ध का अभाव रहेगा।
चतुर्थी श्राद्ध 6 सितम्बर को।
पंचमी और भरणी श्राद्ध 7 सितम्बर को।
षष्ठी श्राद्ध 8 सितम्बर को।
सप्तमी श्राद्ध 9 सितम्बर को।
अष्टमी श्राद्ध 10 सितम्बर को।
नवमी (मातृनवमी भी) श्राद्ध 11 सितम्बर को।
दशमी श्राद्ध 12 सितम्बर को।
एकादशी श्राद्ध 13 सितम्बर को।
द्वादशी (सन्यासी का भी श्राद्ध) श्राद्ध 14 सितम्बर को।
त्रयोदशी एवं मघा श्राद्ध 15सितम्बर को।
चतुर्दशी श्राद्ध (शस्त्राघात से दिवंगत पूर्वजों का भी श्राद्ध) 16 सितम्बर को।
पितृ विसर्जनी अमावस्या 17 सितम्बर को।
जिन पूर्वजों की तिथि अज्ञात है उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन होगा। 
मातामह (नाना-नानी) का श्राद्ध इस वर्ष पहली सितम्बर को ही सम्पन्न होगा।

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  • Web Title:Pitrupaksh 2020: Shraddha of poornima will be held on this date the blessing of fathers is obtained by offering ancestors