DA Image
हिंदी न्यूज़ › धर्म › Pitru Paksha Shradh 2021 : पितृपक्ष में करें पितृदोष का निवारण, मिलेगी शांति, जानें पितृदोष के लक्षण और उपाय
पंचांग-पुराण

Pitru Paksha Shradh 2021 : पितृपक्ष में करें पितृदोष का निवारण, मिलेगी शांति, जानें पितृदोष के लक्षण और उपाय

हिन्दुस्तान टीम,नवादाPublished By: Yogesh Joshi
Thu, 23 Sep 2021 10:11 PM
Pitru Paksha Shradh 2021 : पितृपक्ष में करें पितृदोष का निवारण, मिलेगी शांति, जानें पितृदोष के लक्षण और उपाय

Pitru Paksha Shradh 2021 :  सोमवार से पितृपक्ष आरंभ हो गया है। आश्विन के सम्पूर्ण प्रथम पक्ष तक चलने वाले पितृपक्ष में प्रेतयोनि में भटक रहे मृत आत्माओं की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करने का विधान किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेन्द्र झा कहते हैं कि मोक्षभूमि गयाधाम में श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व है। प्राय: अकाल मृत्यु और आत्महत्या से मरने वाले प्रेतयोनि में चले जाते हैं। अपने शुभकार्यों, ईशप्रार्थना एवं परिजनों के श्राद्धकर्म से मृतात्मा को इस लोक से ऊपर पितृलोक प्राप्त होता है। ज्योतिष ग्रंथों एवं पुराणों के अनुसार 18 प्रकार के प्रेत होते हैं। मनुष्य योनि में इनकी अतृप्त कामना रह जाने से यह नन्हे बच्चों, महिलाओं एवं दुर्बल व्यक्तियों को परेशान करते हैं। इनकी इच्छाएं अतृत्प होती हैं। यह भूलोक के पास ही रहती हैं। जहां पूजा-पाठ, गायत्री जाप, ईश वंदना एवं देव मंदिर तथा तुलसी चौरा होगा, वहां इनका आगमन नहीं होता। जब कभी इस योनि का प्रभाव जीवित व्यक्तियों पर पड़ता है तो उसे कई प्रकार का कष्ट होने लगता है।

मेष, कर्क, वृश्चिक और धनु राशि पर हैं मंगल देव मेहरबान, सूर्य की तरह चमकेगा भाग्य

जानें क्या हैं पितृदोष के लक्षण

  • मृतात्माओं की इहलोक में ही भटकते रहने पर पितृदोष अथवा अन्य कई प्रकार के लक्षण व्यक्तियों के घर में और शरीर में दिखाई पड़ने लगते हैं। यह लक्षण हैं, घर में निरंतर बीमारी का आगमन, वंश में रूकावट, संतान का जन्म लेने के साथ मृत्यु, मानसिक अशांति, व्यापार में घाटा, विवाह में अवरोध, आकस्मिक दुर्घटना, घर में परिजनों को बराबर बुरा एवं डरावना सपना आना, कुछ भी इच्छित न होना, बने काम बिगड़ जाना आदि पितृदोष के लक्षण हैं जिसका निवारण कर लेना लाजिमी होता है।

शांति के लिए करें उपाय

  • पंडित धर्मेन्द्र झा कहते हैं कि जब पितरों को पितृलोक में उचित स्थान मिल जाता है तो वे प्रसन्न होकर अपने परिजनों को खूब आशीर्वाद देते हैं। घर के सभी संकट दूर हो जाते हैं। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखना ही श्राद्ध है। तर्पण, भोजन, पिण्डदान और वस्त्रदान व दक्षिणा श्राद्ध के चार अंग होते हैं। पितृदोष एवं पूर्वजन्म के पापों से मुक्ति के लिए राहुकाल में शिवपूजन अवश्य करनी चाहिए। प्रत्येक अमावस्या पर पितरों का नाम लेकर तर्पण अवश्य करें। पितृदोष निवारक कवच धारण करना भी एक उपाय है। पितृदोष से मुक्ति के लिए गया तीर्थधाम में मृतजनों का पिण्डदान कराना सबसे लाभदायी होता है। भगवान राम ने भी गयाधाम के फल्गु नदी तट पर अपने पिता महाराज दशरथ का तर्पण और श्राद्ध किया था।

संबंधित खबरें