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Pitru Paksha Shradh 2021 : पितरों को प्रसन्न करने के लिए होंगे श्राद्ध कर्म, करें ये काम, नोट कर लें श्राद्ध की तिथियां

संवाददाता,लखनऊPublished By: Yogesh Joshi
Sun, 19 Sep 2021 08:38 PM
Pitru Paksha Shradh 2021 : पितरों को प्रसन्न करने के लिए होंगे श्राद्ध कर्म, करें ये काम, नोट कर लें श्राद्ध की तिथियां

Pitru Paksha Shradh 2021 : भाद्र मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आश्विन मास की अमावस्या तक पितृ पक्ष मनाया जाता है। पूर्णिमा तिथि इस बार 20 सितम्बर को पड़ रही है। पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म किये जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करने का समय है।

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि पितृ पक्ष के इन 16 दिनों की अवधि के दौरान सभी पूर्वज अपने परिजनों को आशीर्वाद देने पृथ्वी पर आते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंड दान किया जाता है। पितृपक्ष में किये गए दान-धर्म के कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को तो शांति मिलती है, साथ ही पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।

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ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के पखवाड़े में पितृ किसी भी रूप में आपके घर में आते हैं। किसी भी पशु या इंसान का अनादर नहीं किया जाना चाहिए। आपके दरवाजे पर आने वाले किसी भी प्राणी को भोजन दिया जाना चाहिए और आदर सत्कार करना चाहिए। जिस तिथि को पितरों की मृत्यु हुई हो, उस तिथि को उनके नाम से श्रद्धा और यथाशक्ति ब्राह्मणों को भोजन करवाएं। भोजन गाय, कौओं और कुत्तों को भी खिलाएं. जिन पितरों की पुण्यतिथि परिजनों को ज्ञात नहीं हो तो उनका श्राद्ध, दान, एवं तर्पण पितृविसर्जनी अमावस्या के दिन करते है। पितृविसर्जनी अमावस्या तिथि को समस्तों पितरों का विसर्जन होता है।

पितृ पक्ष का महत्व

  • वेदविद्यालय हनुमान सेतु के वेदाचार्य गोविन्द कुमार शर्मा पितृ पक्ष में विधि विधान से तर्पण करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है। यह भी कहा जाता है कि पितृ पक्ष में जो भी अर्पण किया जाता है वह पितरों को मिलता है। पितृ अपना भाग पाकर तृप्त होते हैं और प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।

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श्राद्ध की तिथियां

20 सितंबर : पूर्णिमा श्राद्ध

21 सितंबर : प्रतिपदा श्राद्ध

22 सितंबर : द्वितीय श्राद्ध

23 सितंबर : तृतीया श्राद्ध

24 सितंबर : चतुर्थी श्राद्ध

25 सितंबर : पंचमी श्राद्ध

27 सितंबर षष्ठी श्राद्ध

28 सितंबर : सप्तमी श्राद्ध

29 सितंबर : अष्टमी श्राद्ध

30 सितंबर : नवमी श्राद्ध (मातृनवमी)

01 अक्टूबर : दशमी श्राद्ध

02 अक्टूबर : एकादशी श्राद्ध

03 अक्टूबर : द्वादशी श्राद्ध, संन्यासी, यति, वैष्णवजनों का श्राद्ध

04 अक्टूबर : त्रयोदशी श्राद्ध

05 अक्टूबर चतुर्दशी श्राद्ध

06 अक्टूबर : अमावस्या श्राद्ध, अज्ञात तिथि पितृ श्राद्ध

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