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Pitru Paksha 2021: महालय का आरंभ होगा आज से, प्रयागराज से शुरू होती है पिंडदान की परंपरा

ईश्वर शरण शुक्ल,प्रयागराजPublished By: Saumya Tiwari
Mon, 20 Sep 2021 05:22 AM
Pitru Paksha 2021: महालय का आरंभ होगा आज से, प्रयागराज से शुरू होती है पिंडदान की परंपरा

पितरों के निमित्त अर्पण, तर्पण और समर्पण का पितृ पक्ष 21 सितंबर से शुरू हो रहा है लेकिन पूर्णिमा तिथि पर दिवंगत हुए लोगों का श्राद्ध 20 सितंबर को किया जाएगा। वंशज श्रद्धा भाव से पुण्य आत्मा का श्राद्ध करके पूर्वजों से आशीष प्राप्त करेंगे। पितरों की मौन आवाज से संगम की शांत लहरें भी विह्वल रहेंगी। कोरोना के कारण जो लोग अपने पूर्वजों के पिंडदान, कर्मकांड के लिए प्रयाग नहीं पहुंच पाए थे वे भी इस बार संगम आएंगे। ऐसे लोगों ने एक सप्ताह पहले से अपने पुरोहितों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। कुछ लोग आने भी लगे हैं। तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि कोरोना की दूसरी लहर ने जिस तरह कहर बरपाया, उसे देखते हुए इस बार संगम पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है।

प्रयागराज से शुरू होती है पिंडदान की परंपरा

देवरहा बाबा आश्रम के स्वामी रामेश्वर प्रपन्नाचार्य शास्त्री ने बताया कि प्रयाग में 12 माधव होने के कारण पिंडदान का अधिक महत्व है। प्रयाग के प्रधान देवता माधव हैं। पिंडदान की परंपरा सिर्फ प्रयाग, काशी और गया में ही है। पितरों के श्राद्ध कर्म की शुरुआत प्रयाग के मुंडन संस्कार से शुरू होती है। संगम पर पिंडदान करने से भगवान विष्णु के साथ ही तीर्थराज प्रयाग में वास करने वाले तैंतीस करोड़ देवी-देवता भी पितरों को मोक्ष प्रदान करते हैं।

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महालय का आरंभ होगा कल से

उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के अनुसार 21 सितम्बर को सूर्योदय के साथ ही आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा शुरू हो जाएगी। इसलिए पितृ पक्ष का आरम्भ 21 सितम्बर से होगा लेकिन पूर्णिमा का श्राद्ध भाद्र पद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को होता है इसलिए महालय का आरंभ 20 सितंबर से होगा। पूर्वांचली ने बताया कि पितृ पक्ष में श्राद्ध तर्पण कर अपने पितरों के प्रति श्रद्धा निवेदन करना अनिवार्य है। इससे पितृगण प्रसन्न होकर शुभ फल प्रदान करते हैं।

यहां से आते हैं सबसे ज्यादा श्रद्धालु

प्रयागराज में पिंडदान के लिए कई प्रदेश के श्रद्धालु आते हैं। तीर्थ पुरोहित राजन गुरु ने बताया कि पितृ पक्ष में इस बार पूर्वांचल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, और बुंदेलखंड क्षेत्र से श्रद्धालु आने लगे हैं। इनमें रीवा, सतना, जबलपुर, दमोह, नरसिंहपुर, कटनी, बिलासपुर, रायपुर, जांजगीर, चांपा, भोपाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान के लिए आएंगे। कई जिलों के श्रद्धालु व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए संपर्क भी कर रहे हैं।

फतेहपुर के श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान

पितृ पक्ष से पूर्व ही संगम पर पिंडदान को श्रद्धालु आने लगे हैं। शनिवार को खागा फतेहपुर से आए 10 श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान किया। तीर्थ पुरोहित गगन भरद्वाज ने बताया कि जो श्रद्धालु प्रयाग में पिंडदान के बाद काशी और गया जाना चाहते हैं वे पितृ पक्ष से पहले आ रहे हैं। प्रयागराज को भगवान विष्णु का मुख, काशी को नाभि और गया को चरण माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु प्रयाग में पिंडदान कर काशी व गया जाते हैं।

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समूह में कराएंगे पिंडदान

दूर-दराज से श्रद्धालु संगम आने लगे हैं। घर से चलने से पहले लोग कर्मकांड से संबंधित जानकारी भी ले रहे हैं। ज्यादातर समूह में पिंडदान कराने की व्यवस्था की गई है।

-वीरेंद्र कुमार पंडा

बदला रहेगा संगम का माहौल

इस बार पितृ पक्ष के दौरान संगम का माहौल बदला रहेगा। कोरोना के कारण जो लोग संगम नहीं आ पाए थे वे भी पितरों के निमित्त तर्पण, कर्मकांड के लिए आएंगे। पितरों की संतुष्टि के लिए गाय, कौआ और कुत्तों के निमित्त आहार निकाल दिया जाता है। -राजन गुरु

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ऑनलाइन भी होगा पिंडदान

तीर्थ पुरोहित प्रदीप पांडेय ने बताया कि जो श्रद्धालु ऑनलाइन पिंडदान कराने के इच्छुक होते हैं उनके लिए व्यवस्था की जाती है। पहले से बुकिंग की जाती है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति का मृतक से संबंध, गोत्र, अवस्था, मृत्यु तिथि, कारण, समय, स्थान और फोटो प्राप्त करके विधिविधान से ऑनलाइन पिंडदान कराया जाता है।

पाबंदियां हटने से बढ़ेगी संख्या

कोरोना के कारण श्रद्धालु कर्मकांड के निमित्त संगम कम आ रहे थे। लेकिन इस बार पाबंदियां हटने और साधनों की उपलब्धता के कारण अधिक संख्या में श्रद्धालु पिंडदान के लिए आएंगे। प्रयाग के बाद काशी और गया जाएंगे। -शिवम पंडा

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