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सक्सेस मंत्र : विपरीत परिस्थितियों में सुदृढ़ रहने वाला ही है सच्चा हीरा

success mantra

अनुकूल परिस्थितियों में सही तरह से काम करना तो ज्यादातर लोग जानते हैं। मगर जो विपरीत परिस्थितियों में खुद पर काबू रखते हुए काम को अंजाम देता है, असल में वही विजेता होता है। अक्सर लोग परिस्थितियां प्रतिकूल होने पर खुद पर काबू नहीं रख पाते हैं और अपना आपा खो बैठते हैं। ऐसे लोगों के लिए छोटी-छोटी परिस्थितियों को काबू में करना मुश्किल होता है। हमारी आज की कहानी भी कुछ ऐसा ही बताती है। 

एक राजा का दरबार लगा हुआ था। सर्दियों के दिन थे, इसीलिए पूरी आम सभा सुबह की धूप मे बैठी थी। महाराज ने सिंहासन के सामने एक मेज रखवा दी थी। पंडित लोग दीवान आदि सभी दरबार में बैठे थे। राजा के परिवार के सदस्य भी वहां मौजूद थे। 

उसी समय एक व्यक्ति आया और राजा से दरबार में मिलने की आज्ञा मांगी। प्रवेश मिलने पर उसने कहा, मेरे पास बिलकुल एक जैसी दिखने वाली दो वस्तुएँ हैं। मगर इनमें से एक नकली है और एक असली। मैं हर राज्य के राजा के पास जाता हूं और उन्हें परखने का आग्रह करता हूं। लेकिन कोई परख नहीं पाता, सब हार जाते हैं और मैं विजेता बनकर घूम रहा हूं। अब आपके नगर में आया हूं। राजा ने उसे दोनों वस्तुओं को पेश करने का आदेश दिया।  

उसने दोनों वस्तुएं मेज पर रख दीं। बिल्कुल समान आकार, समान रूप रंग, समान प्रकाश, सब कुछ नख शिख समान। राजा ने कहा, ये दोनों वस्तुएं एक हैं। तो उस व्यक्ति ने कहा, हां दिखाई तो एक सी देती हैं लेकिन हैं भिन्न। इनमें से एक बहुत कीमती हीरा है और एक कांच का टुकड़ा है, लेकिन रूप रंग सब एक है। कोई आज तक परख नहीं पाया कि कौन सा हीरा है और कौन सा कांच? कोई परख कर बताए कि ये हीरा है या कांच। अगर परख खरी निकली तो मैं हार जाऊंगा और यह कीमती हीरा मैं आपके राज्य की तिजोरी में जमा करवा दूंगा, यदि कोई न पहचान पाया तो इस हीरे की जो कीमत है उतनी धनराशि आपको मुझे देनी होगी। इसी प्रकार मैं कई राज्यों से जीतता आया हूं। 

राजा ने कई बार उन दोनों वस्तुओं को गौर से देखकर परखने की कोशिश की और अंत में हार मानते हुए कहा, मैं तो नहीं परख सकूंगा। दीवान बोले, हम भी हिम्मत नहीं कर सकते, क्योंकि दोनों बिल्कुल समान है। सब हारे, कोई हिम्मत नहीं जुटा पाया। हारने पर किसी को कोई पैसे देने का मलाल नहीं था क्योंकि राजा के पास बहुत धन था लेकिन सबको भय था कि राजा की प्रतिष्ठा गिर जाएगी।

कोई व्यक्ति पहचान नहीं पाया। आखिरकार पीछे थोड़ी हलचल हुई। एक अंधा आदमी हाथ में लाठी लेकर उठा। उसने कहा, मुझे महाराज के पास ले चलो। मैंने सब बातें सुनी हैं और यह भी सुना कि कोई परख नहीं पा रहा है। एक अवसर मुझे भी दो। एक आदमी के सहारे वह राजा के पास पहुंचा और राजा से प्रार्थना की, मैं तो जनम से अंधा हूं फिर भी मुझे एक अवसर दिया जाए जिससे मैं भी एक बार अपनी बुद्धि को परखूं। हो सकता है कि सफल भी हो जाऊं और यदि सफल न भी हुआ तो वैसे भी आप तो हारे ही हैं। 

राजा को लगा कि इसे अवसर देने मे कोई हर्ज नहीं है और राजा ने उसे अनुमति दे दी। दोनों वस्तुएं उस अंधे आदमी को के हाथ में दी गईं और पूछा गया कि इनमें कौन सा हीरा है और कौन सा कांच? उस आदमी ने एक मिनट में बता दिया कि कौन सा हीरा है और कौन सा कांच। जो आदमी इतने राज्यों को जीतकर आया था वह नतमस्तक हो गया और बोला सही है, आपने पहचान लिया! आप धन्य हैं।

अपने वचन के मुताबिक यह हीरा मैं आपके राज्य की तिजोरी में दे रहा हूं। सब बहुत खुश हो गए और जो आदमी आया था वह भी बहुत प्रसन्न हुआ कि कम से कम कोई तो मिला परखने वाला। राजा और अन्य सभी लोगों ने उस अंधे व्यक्ति से एक ही जिज्ञासा जताई कि, 'तुमने हीरा और कांच को आखिर कैसे पहचाना?

उस अंधे ने कहा, सीधी सी बात है राजन, हम सब धूप में बैठे हैं मैंने दोनों को छुआ। जो ठंडा रहा वह हीरा, जो गरम हो गया वह कांच।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है : 

  • यही बात हमारे जीवन में भी लागू होती है, जो व्यक्ति बात बात में अपना आप खो देता है, गरम हो जाता है और छोटी से छोटी समस्याओं में उलझ जाता है वह कांच जैसा है। जो विपरीत परिस्थितियों में भी सुदृढ़ रहता है और बुद्धि से काम लेता है वही सच्चा हीरा है।  
  • हर परिस्थिति का मुआयना करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचने वाले व्यक्ति ही अंत में विजेता बनकर निकलते हैं। जो छोटी-छोटी बातों पर अपनी सोचने-समझने की शक्ति खो देते हैं, वे कहीं नहीं पहुंच पाते हैं। वे इसी तरह जूझते रहते हैं और मंजिल से भटक जाते हैं।
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  • Web Title:People who maintain their cool even in adverse condition are the real winners