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Paush Purnima: 5 अद्भुत संयोग में पौष पूर्णिमा कल, नोट कर लें पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्र दर्शन टाइम

Pausha Purnima 2024: कल पौष पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है पौष पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की एक साथ पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

Paush Purnima: 5 अद्भुत संयोग में पौष पूर्णिमा कल, नोट कर लें पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्र दर्शन टाइम
Shrishti Chaubeyलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 25 Jan 2024 09:45 AM
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Paush Purnima 2024: ज्योतिष विद्या में पौष पूर्णिमा विशेष महत्व रखती है। पौष पूर्णिमा के दिन विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की आराधना की जाएगी। पूर्णिमा तिथि 25 जनवरी को पड़ रही है, इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देना बेहद ही शुभ माना जाता है। मान्यता है पौष पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की एक साथ पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। इसलिए आइए जानते हैं पौष पूर्णिमा पूजन शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय का समय-

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मार्गशीर्ष  पूर्णिमा कब?

  पौष , शु क्ल पूर्णिमा  प्रारम्भ  - 09:49 पी एम, जनवरी 24
पौष, शुक्ल पूर्णिमा प्रारम्भ समाप्त - 11:23 पी एम, जनवरी 25

हर साल पौष महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल की पहली पूर्णिमा पड़ती है। 24 जनवरी, बुधवार के दिन रात 09 बजकर 49 मिनट से पूर्णिमा तिथि की शुरुआत होगी, जो गुरुवार, 27 दिसंबर के दिन रात 11 बजकर 23 मिनट तक रहने वाली है। उदयातिथि के अनुसार, साल की पहली पूर्णिमा 25जनवरी को मान्य होगी और इसी दिन पूर्णिमा व्रत और दान-स्नान किया जाएगा। 

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पौष पूर्णिमा पर दुर्लभ संयोग 
इस साल सर्वार्थ पौष पूर्णिमा पर प्रीति योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि, रवि योग का संयोग बन रहा है। गुरुवार और त्रिग्रही योग के निर्माण से पूर्णिमा का महत्व बढ़ जाता है। गुरु पुष्य योग में माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा अत्यंत शुभ और पुण्यदायक मानी जाती है।  

पूर्णिमा पूजा-विधि
पौष पूर्णिमा के दिन पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण की साथ में पूजा करनी चाहिए। इस दिन विष्णु भगवान को पीले रंग के फल, फूल और वस्त्र चढ़ाने चाहिए और लक्ष्मी माता को गुलाबी या लाल रंग के फूल और श्रृंगार का सामान चढ़ाना चाहिए। वहीं, पौष पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा पढ़ना पुण्यदायक माना जाता है। पौष पूर्णिमा तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में नदी में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं, अगर आप नदी में स्नान नहीं कर सकते तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर घर में ही स्नान करें। पौष पूर्णिमा का व्रत रखने और इस दिन लक्ष्मी नारायण की विधिवत पूजा करने से घर में सुख-संपत्ति और खुशहाली बनी रहती है।

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पूर्णिमा शुभ मुहूर्त 
ब्रह्म मुहूर्त- 05:09 ए एम से 06:02 ए एम    
प्रातः सन्ध्या    - 05:36 ए एम से 06:55 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 11:57 ए एम से 12:40 पी एम    
विजय मुहूर्त- 02:07 पी एम से 02:50 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 05:40 पी एम से 06:06 पी एम    
सायाह्न सन्ध्या- 05:42 पी एम से 07:02 पी एम
अमृत काल- 03:29 ए एम, जनवरी 26 से 05:14 ए एम, जनवरी 26    
निशिता मुहूर्त- 11:52 पी एम से 12:45 ए एम, जनवरी 26
गुरु पुष्य योग- 08:16 ए एम से 06:55 ए एम, जनवरी 26    
सर्वार्थ सिद्धि योग- पूरे दिन
अमृत सिद्धि योग- 08:16 ए एम से 06:55 ए एम, जनवरी 26    
रवि योग- 06:55 ए एम से 08:16 ए एम
चंद्रोदय समय- 05:18 पी एम

उपाय- पवित्र जल में कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्रदेव की कृपा सदैव बनी रहती है। इससे मानसिक सुख-शांति भी बनी रहती है। 

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। 

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