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पंचांग-पुराणParshuram Birthday 2021 Janmotsav Date Time : एक क्लिक में पढ़ें श्री परशुराम चालीसा, मिलेगी अद्भत शक्ति

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Yogesh Joshi
Thu, 13 May 2021 02:51 PM
Parshuram Birthday 2021 Janmotsav Date Time : एक क्लिक में पढ़ें श्री परशुराम चालीसा, मिलेगी अद्भत शक्ति

अक्षय तृतीया के पावन दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इस साल 14 मई, 2021 को भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन विधि- विधान से भगवान परशुराम की पूजा- अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम की पूजा- अर्चना करने से शक्ति का संचार होता है। इस पावन दिन श्री परशुराम चालीसा का पाठ अवश्य करें। 

  • श्री परशुराम चालीसा

श्रीशिव गुरु स्वामी माहेश्वर मज तु उद्धारी ।
उमा सहीत दायकु आर्शिवाद मज तु तारी ॥

बुद्धिदेवता तव जानिके दिये परशु तुमार ।
तव बल जानिये दुनिया सारी दुष्टि करे हहाकार ॥

॥ चौपाई ॥

जय परशुराम बलवान दुनिया सार।
जय रामभद्र कहे लोक करे जागर॥१॥

शिव शिष्य भार्गव तव नामा ।
रेणुका पुत्र जमतग्निसुत लामा ॥२॥

शुरविर नारायण तव अंगी ।
छटा अवतार सुहीत के संगी ॥३॥

परशु तव हस्ता दिसे सुवेसा ।
ऋषि मुद्रिका तव मन श्रेसा ॥४॥

हाथ शिवधनुष्य भार्गवा साजै ।
विप्र कुल कांधे जनेउ साजै ॥५॥

विष्णु अंश ब्रह्मकुलनंदन ।
तव गाथा पढे करे जग वंदन ॥६॥

वेद ही जानत असे चतुर ।
शिवजी के शिष्य बलशाली भगुर ॥७॥

पृथ्वि करे निक्षेत्र एक्कीस समया ।
विप्र रक्षोनी दुष्टास मारीया ॥८॥

भार्गव अवतारी तव गुन गावा ।
कर्म स्वरुपे तव चिरंजीवी पावा ॥९॥

सहस्राजुना तव तु संहारे ।
पिता वचन दिये तव तु पारे ॥१०॥

पीता होत तव अज्ञाये ।
माता शिरछेद कर तु जाये ॥११॥

जमदग्नी कहे मम पुत्र प्रियई ।
तुम जो चांहे आर्शिवाद मांगई ॥१२॥

भद्र कहते मम माता ही जगावैं ।
भ्राता सहीत मम सामोरी लावैं ॥१३॥

तव मुखमंडल दिसे ऋषिसा ।
घोर तपस्वि पठन संहीता ॥१४॥

मुद्रा गिने कुबेर ही थक जांते ।
तव धन कबि गिन ना पांते ॥१५॥

तुम उपकार ब्रह्मकुले कीह्ना ।
ब्रह्म मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

तुह्मरो शक्ती सब जग जाना ।
राक्षस कांपे तुमये भय माना ॥१७॥

तुम चिरंजीव असे जग जानु ।
जो करे तव भक्ती मधुर फल भानु ॥१८॥

बुद्धिदाता परशु हथ तुज देई ।
शिव धनुष्य माहेश्वर मिलमेेई ॥१९॥

दुष्ट संहार कर त्रिलोक जिते ।
ब्रह्मकुल के तुम भाग्यविधाते ॥२०॥

ऋषि मुनि के तुम रखवारे ।
शिव आज्ञा होत दुहीत को संहवारे ॥२१॥

सब जग आंये तुह्मरी शरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥

परशु चमक रवि ही छुंपै ।
भार्गव नाम सुनत दुष्ट थर कांपै ॥२३॥

रेणुका पुत्र नाम जब आंवै ।
तब तव गान सहस्र जुग गांवै ॥२४॥

परशुराम नाम सुरा ।
जपत रहो ब्रह्मविरा ॥२५॥

संकट पडे तो भद्र बचांवै ।
मन से ध्यान भार्गव जो लांवै ॥२६॥

जगत के तुम तपस्वी राजा ।
ब्रह्मकुल जन्मे उपकार मज वर कीजा ॥२७॥

इच्छा धरीत तुज भक्ती जो कीवै ।
इच्छित जो तिज फल पावै ॥२८॥

भार्गव नाम सुनित होय उजियारा ।
आज्ञा पालत तव जग दिवाकरा ॥२९॥

राम सह धनुर युद्ध पुकारे ।
अवतार सप्तम समज दुवारे ॥३०॥

युद्ध कौशल्य वेदो जानता ।
कौतुक देखे रेणुका माता ॥३१॥

चारो जुग तुज कीर्तीमासा ।
सदा रहो ब्रह्मकुल के रासा ॥३२॥

तेहतीस कोट देव तुज गुन गावै ।
भार्गव नाम लेत सब दुख बिसरावै ॥३३॥

तुज नाम महीमा लागे माई ।
जनम जनम करे पुण्य कमाई ॥३४॥

म्हारे चित्त तुज दुज ना जाई ।
सारे सेई सब सुख मज पाई ॥३५॥

परशुराम नाम सुने भागे पीरा ।
भद्र नाम सुनत उठे ब्रह्मविरा ॥३६॥

जय परशुराम कहें मज विप्राईं ।
तुज कृपा करहु भार्गव नाईं ॥३७॥

पठे जो यह शत बार कोई ।
भार्गव कृपा उस सदैव होई ॥३८॥

पढित यह परशुराम चालीसा ।
सुख शांती नांदे रहे विष्णुदासा ॥३९॥

वसंतसुत पुरुषोत्तम रज असै तैरा।
तुज भक्ती मोही जुग जग सारा ॥४०॥

॥ दोहा ॥

रेणुका नंदन नारायण अंश ब्रह्मकुल रुप ।
परशुराम भार्गव रामभद्र ह्रदयी बसये भुप ॥

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