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Papankusha Eadashi : पापांकुशा एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये काम, यहां देखें पूजा- विधि

Papankusha Ekadashi : हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल 6 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी 

Papankusha Eadashi : पापांकुशा एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये काम,  यहां देखें पूजा- विधि
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 06 Oct 2022 05:00 AM

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Papankusha Ekadashi : हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल 6 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी है। मान्यता है कि पापांकुशा एकादशी के दिन विधि-विधान से पूजा व व्रत रखने भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां लक्ष्मी अपनी कृपा बरसाती हैं और समस्त कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी के दिन श्रीहरि का नाम जपने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानते हैं, इस दिन क्या नहीं करना चाहिए....

एकादशी पर भूलकर न करें ये काम-

1. पापांकुशा एकादशी व्रत के दिन भूलकर भी जुआ नहीं खेलना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से व्यक्ति के वंश का नाश होता है।
2 पापांकुशा एकादशी व्रत में रात को सोना नहीं चाहिए। व्रती को पूरी रात भगवान विष्णु की भाक्ति,मंत्र जप और जागरण करना चाहिए। 
3. पापांकुशा व्रत के दिन भूलकर भी चोरी नहीं करनी चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन चोरी करने से 7 पीढ़ियों को उसका पापा लगता है।  
4. पापांकुशा के दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए व्रत के दौरान खान-पान और अपने व्यवहार में संयम के साथ सात्विकता भी बरतनी चाहिए। 
5. इस दिन व्रती को भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए किसी भी व्यक्ति से बात करने के लिए कठोर शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस दिन क्रोध और झूठ बोलने से बचना चाहिए। 
6. एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए और शाम के समय सोना नहीं चाहिए।

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पापांकुशा एकादशी व्रत पूजा विधि-

1. इस दिन व्रती को सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान करना चाहिए।
2. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करना चाहिए। अब भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण की मूर्ति, प्रतिमा या उनके चित्र को स्थापित करना चाहिए।
3. भक्तों को विधि-विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए।
4. पूजा के दौरान भगवान कृष्ण के भजन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।
5. प्रसाद, तुलसी जल, फल, नारियल, अगरबत्ती और फूल देवताओं को अर्पित करने चाहिए।
6. पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना चाहिए।
7. अगली सुबह यानि द्वादशी पर पूजा के बाद भोजन का सेवन करने के बाद जया एकादशी व्रत का पारण करना चाहिए।

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