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9 अगस्त, 2020|10:38|IST

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5 सबसे धनी मंदिरों में से एक है पद्मनाभस्वामी मंदिर, जानें महत्व और 7वें दरवाजे का रहस्य

padmanabhaswamy temple

देश के सबसे धनी पद्मनाभस्वामी मंदिर को चलाने का अधिकार त्रावणकोर राजघराने को मिल गया है। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अपने फैसले में मंदिर के प्रबंधन में त्रावणकोर के राजपरिवार के अधिकार को मान्यता दे दी है। कहा जाता है कि मंदिर के पास करीब दो लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। 

क्या कहा कोर्ट ने-
केरल के तिरुवनन्तपुरम स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन और अधिकार को लेकर शीर्ष न्यायालय ने कहा कि पूर्व शासक की मृत्यु के बावजूद पद्मनाभस्वामी मंदिर में त्रावणकोर परिवार का अधिकार जारी रहेगा। प्रथा के अनुसार, शासक की मृत्यु पर परिवार का सवेयत यानी प्रबंधन का अधिकार बरकरार रहेगा। कोर्ट ने केरल उच्च न्यायालय के 31 जनवरी 2011 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार से श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का नियंत्रण लेने के लिए न्यास गठित करने को कहा गया था।

हाईकोर्ट के फैसले को पलटा-
न्यायमूर्ति यू यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अंतरिम उपाय के रूप में मंदिर के मामलों के प्रबंधन वाली प्रशासनिक समिति की अध्यक्षता तिरुवनंतपुरम के जिला न्यायाधीश करेंगे। शीर्ष अदालत ने इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। इनमें से एक याचिका त्रावणकोर शाही परिवार के कानूनी प्रतिनिधियों ने दायर की थी।
गौरतलब है कि यह मंदिर तब सुर्खियों में आया था जब इसकी तिजोरियों में अकूत संपदा का खुलासा हुआ था। अभी इसकी एक तिजोरी यानी वाल्ट- बी नही खुली है। कहा गया था कि बी तिजोरी को बिना सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के नहीं खोला जाएगा। सुनवाई के दौरान केरल सरकार और राजपरिवार, दोनों ने ही कहा था कि वे मंदिर की तिजोरियों में मिली संपदा पर कोई दावा नहीं करना चाहते क्योंहकि यह सब मंदिर का है।

7वें तहखाने का राज और 2 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर पर अधिकार को लेकर भले ही शीर्ष अदालत का फैसला आ गया हो, लेकिन देश का सबसे अमीर मंदिर अन्य विवादों के चलते भी काफी चर्चा में रहा है। मंदिर के 7वें दरवाजे का रहस्य और उसकी अकूत संपत्ति आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है। आईए जानते हैं कि क्या पूरा विवाद।

कब हुआ निर्माण-
छठी शताब्दी में बनाया गया त्रावणकोर मंदिर का जिक्र 9वीं शताब्दी के ग्रंथों में है। त्रावणकोर के राजाओं द्वारा निर्मित इस मंदिर के लिए 1750 में महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को भगवान का सेवक यानि पद्मनाभ दास बताया जिसके बाद त्रावणकोर के राजाओं ने अपनी संपत्ति और जीवन भगवान के नाम कर दी। 1947 तक त्रावणकोर के राजाओं ने यहां शासन किया। इसके बाद मंदिर की देख-रेख का जिम्मा शाही परिवार के अधीन  ट्रस्ट के हाथों में चला गया।

क्या है मान्यता- 
मान्यता है कि सबसे पहले इस स्थान से विष्णु भगवान की प्रतिमा प्राप्त हुई थी जिसके बाद उसी स्थान पर इस मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है जिसे देखने के लिए हजारों भक्त दूर दूर से यहां आते हैं।

मंदिर के छह दरवाजों खोले गए-  
- जून 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने मंदिर के गुप्त तहखानों को खोलें और उनमें रखी वस्तुओं का निरीक्षण करने का आदेश दिया
- मंदिर के छह दरवाजों को खोला गया तो इन तहखानों में 1 लाख करोड़ से ज्यादा कीमत के सोने-हीरे के आभूषण मिले
-  200 ईसा पूर्व के 800 किलो सोने के सिक्के मिले, हर सिक्के की कीमत करीब 2.7 करोड़ रुपये आंकी गई
- पूर्व कैग विनोद राय ने मंदिर के रिकॉर्ड्स की जांच की थी तो पता चला कि सोने का सिंहासन है जिसपर रत्न और हीरे-पन्ने जड़े हुए हैं

7वां दरवाज क्यो नहीं खोला गया-
सुप्रीम कोर्ट ने 7वें तहखाने को खोलने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि ये मंदिर की पवित्रता का मामला। ऐसा कहा जाता है कि इस तहखाने 52.59 लाख करोड़ का खजाना हो सकता है। मान्यता है कि इस सांतवें दरवाजे को नाग बंधक या नाग पाशक मंत्रों से बंद किया गया है। अगर इसे खोलने में कोई भी चूक हो गई तो मृत्यु निश्चित मानी जाती है। 1931 में इसके दरवाजे को खोलने की कोशिश की जा रही थी तो हजारों नागों ने मंदिर के तहखाने को घेर लिया था।

टॉप 5 सबसे अमिर मंदिर-
1.पद्मनाभस्वामी मंदिर : कुल संपत्ति लगभग दो लाख करोड़ रुपये यानि 20 बिलियन डॉलर की है।
2. तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर : मंदिर को लगभग सालाना 650 करोड़ रुपये मिलते हैं।
3. शिरडी साईं बाबा : मंदिर को दान में मिलने वाली साल भर की आमदनी 360 करोड़ रुपये है।
4. वैष्णो देवी मंदिर : इस मंदिर की साल भर की आय 500 करोड़ रुपये है।
5. सिद्धिविनायक मंदिर : इस मंदिर को हर साल 125 करोड़ रुपये की कमाई होती है।

11 साल की कानूनी लड़ाई- 
वर्ष 2009 : केरल उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर मंदिर का नियंत्रण राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का अनुरोध।
31 जनवरी 2011 : उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में राज्य सरकार को मंदिर का नियंत्रण अपने हाथ में लेने को कहा।
 02 मई 2011 : त्रावणकोर के आखिरी शासक के भाई उतरादम तिरुनल मार्तंड वर्मा की याचिका उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए आई।
 8 जुलाई 2011 : उच्चतम न्यायालय ने ए और बी संख्या के तहखाने को अगले आदेश तक खोलने की प्रक्रिया को स्थगित किया। 
 21 जुलाई 2011 : उच्चतम न्यायालय ने मिली वस्तुओं के संरक्षण के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया 
 22 सितंबर 2011 : उच्चतम न्यायलय ने कहा कि कल्लरा संख्या 'बी को खोलने का फैसला अन्य कल्लरा को खोलने से मिली वस्तुओं के प्रगति के आधार पर लिया जाएगा। 
23 अगस्त 2012 : न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम को न्याय मित्र नियुक्त किया। 
06 दिसंबर 2013 : उतरादम तिरुनल मार्तंड वर्मा का निधन हुआ, उनके वैध उत्तराधिकारी न्यायालय में उनकी ओर से मामले में शामिल हुए।
 24 अप्रैल 2014 : न्यायालय ने मंदिर के प्रबंधन के लिए तिरुवनंतपुरम के जिला न्यायाधीश के नेतृत्व में प्रशासनिक समिति गठित की। 
 27 नवंबर 2014 : न्यायालय ने अदालत मित्र की कुछ अनुशंसाओं को स्वीकार किया। 
04 जुलाई 2017 : उच्चतम न्यायालय ने न्यायमूर्ति के एस पी राधाकृष्णन को श्रीकोविल एवं अन्य संबंधी कार्यों के लिए गठित चयन समिति का अध्यक्ष बनाया। 
जुलाई 2017 : न्यायालय ने कहा कि वह मंदिर की एक तिजोरी में दैवीय शक्ति लिए असाधारण खजाना होने के दावे का परीक्षण करेगा।
10 अप्रैल 2019 : न्यायालय ने मामले में 31 जनवरी 2011 को केरल उच्च न्यायालय के दिए आदेश को चुनौती देने की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। 
13 जुलाई 2020 : उच्चतम न्यायालय ने मंदिर प्रशासन में त्रावणकोर राजपरिवार के अधिकार को बरकरार रखा। 

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  • Web Title:Padmanabhaswamy temple of kerala is one of the 5 wealthiest temples know the supreme court verdict and importance and mystery behind the 7th golden room door of the mandir