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..सबसे बढ़कर आत्मबल

एक बार एक व्यक्ति अपने मित्र के यहां हवन-पूजन में गया। वहां उसे ज्ञात हुआ कि भगवान गणेश जी की पूजा सबसे पहले करनी चाहिए। उसने घर आकर गणेश जी की पूजा शुरू की, इसी बीच उसने देखा कि गणेश जी के भोग में से एक चूहे ने मिठाई ली और चला गया। उसे लगा कि गणेश जी से ये चूहा ही बलवान है, क्यों न मैं इसकी पूजा करूं?

ऐसा विचार कर उसे अज्ञानी व्यक्ति ने चूहे को बांधकर उसकी पूजा शुरू कर दी। इसी दौरान चूहे ने बिल्ली को देखा तो वह भागने लगा लेकिन बिल्ली ने चूहे को पकड़कर खा लिया। अज्ञानी ने अब बिल्ली शक्तिशाली लगने लगी, उसने बिल्ली की पूजा आरंभ कर दी। दूसरे ही दिन उसका पालतू कुत्ता आया और बिल्ली का खाना उसी के सामने से लेकर चला गया और बिल्ली डरी हुई बैठी रही।

यह देख अज्ञानी व्यक्ति हतप्रभ रह गया और कुत्ते को अधिक शक्तिशाली मानते हुए अब उसकी पूजा प्रारंभ कर दी। अभी कुछ ही दिन बीते थे कि कुत्ता उसके घर की ररोई में घुस गया, जहां उसकी पत्नी ने कुत्ते की पिटाई कर दी।अब उस अज्ञानी का दिमाग फिर चक्कर खा गया और उसने अपनी पत्नी की पूजा का फैसला कर लिया क्योंकि कुत्ते से अधिक शक्तिशाली तो उसकी पत्नी है।

एक दिन किसी बात पर व्यक्ति को अपनी पत्नी पर बहुत गुस्सा आ गया और उसने पत्नी को डांट दिया और पत्नी चुप खड़ी रही। यह देखकर उस मूर्ख को ज्ञान हुआ कि अपनी पत्नी से ज्यादा तो वह स्वयं ही शक्तिशाली है। उस दिन सही मायनों में उसे पता चला स्वयं की आत्मा से ज्यादा शक्तिशाली कोई नहीं उसके बाद से उसने स्वयं की आत्मा की पूजा आरंभ की।

नोट: आत्मबल से बढ़कर कुछ नहीं होता। मन में विश्वास करके जो कार्य किया जाए, वह हमेशा पूर्ण और सही होता है। दूसरों की देखा देखी करने से मनुष्य कभी भी सफल नहीं हो पाता, साथ ही औ नीचे गिर जाता है, जिससे नुकसान तो होता ही है बेज्जती भी होती है और वह मजाक का पात्र बनकर रह जाता है।

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