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सक्सेस मंत्र : खुद अपनी तरक्की के रास्ते की रुकावट बनने से बचें

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प्रीति एक दिन स्कूल से आई तो कुछ खोई-खोई सी थी। मां ने कई बार पूछा तो उसने कुछ नहीं बताया। शाम हो गई, पापा भी आ गए। वह अपनी ही सोच में गुम थी। पापा ने उससे पूछा कि आज स्कूल में क्या हुआ तो उसने धीरे से इतना ही कहा कि सब रोज जैसा ही था।

अब तो घर में सबको चिंता होने लगी कि रोज बोल-बोल कर सबका दिमाग खा जाती थी, आज इतना शांत कैसे है। फिर पापा ने उससे एक-एक कर सारे क्लास के बारे में पूछना शुरू किया। जब फ्री पीरियड की बारी आई तो वह शांत हो गई। पापा को लगा उसने कोई बड़ी शरारत की है, जिसकी वजह से वह डर रही है। इस पर उसने बताया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। फिर उसने अपने आप कहा कि आज फ्री पीरियड में मिस ने पूरी क्लास को बताया कि किसी की मौत हो गई है। पापा ने पूछा कि किसकी मौत हुई थी। प्रीति ने बताया कि उसे कुछ समझ में नहीं आया। 

प्रीति ने कहा कि मिस प्रार्थना के लिए सभी स्टूडेंट्स को जहां ले गईं वहां एक कॉफिन रखा हुआ था। सभी से एक-एक कर कॉफिन के पास जाकर प्रार्थना करने को कहा गया। पापा ने पूछा, तो इसमें क्या हो गया बेटा क्या आप डर गई थीं। उसने बताया कि वह डरी नहीं, बस उसे कुछ समझ में नहीं आया। मिस ने जब डेथ के बारे में बताया तो कहा यह शख्स कई साल से पढ़ाई में उनकी तरक्की रोक रहा था। मगर जब हम कॉफिन के पास गए तो कोई नहीं था। उसमें शीशा लगा था। पापा प्रीति की बात सुनकर मुस्करा रहे थ। 

उन्होंने प्रीति को समझाया कि मिस ने जो भी कहा वो एकदम सच था। हम अगर चाह लें तो कोई भी हमारा रास्ता नहीं रोक सकता है। हम खुद अपनी तरक्की के दुश्मन होते हैं। अपने लक्ष्य को पाने अगर कोई चूकता है, तो वह खुद अपनी वजह से ही हो सकता है। हमारा खुद का मन भटकता है, तो ही हम लक्ष्य से दूर होते हैं। 

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