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Vinayaka Chaturthi : विनायक चतुर्थी पर 10:57 मिनट से पूजा का शुभ मुहूर्त, नोट करें मंत्र, पूजाविधि, उपाय

Vinayaka Chaturthi : जून महीने की इस चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाएगा। इस दिन संध्या में व्रती चंद्रमा को अर्घ्य देंगी और भगवान गणेश और चन्द्र देव की आराधना करेंगी।

bhalchandra sankashti chaturthi 2023
Shrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीMon, 10 June 2024 05:49 AM
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Vinayaka Chaturthi 2024: इस साल ज्येष्ठ मास की विनायक चतुर्थी 10 जून के दिन पड़ रही है। इस दिन संध्या में व्रती चंद्रमा को अर्घ्य देंगी। इस दिन भगवान गणेश और चन्द्र देव की आराधना की जाती है। मान्यता के अनुसार, जो भी इस दिन भगवान गणेश की उपासना करते हैं, उनके जीवन से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस व्रत को महिलाएं संतान प्राप्ति एवं अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी करती हैं। आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी पूजा की विधि, तिथि, मंत्र, शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और गणेश जी की आरती-

विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त 
ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी प्रारम्भ - 03:44 पी एम, जून 09
ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी समाप्त - 04:14 पी एम, जून 10
अवधि- 02 घण्टे 47 मिनट्स
चन्द्रोदय का समय- 08:40 ए एम                                                              

पूजा-विधि 
1- भगवान गणेश जी का जलाभिषेक करें       
2- गणेश भगवान को पुष्प, फल चढ़ाएं और पीला चंदन लगाएं 
3- तिल के लड्डू या मोदक का भोग लगाएं  
4- विनायक चतुर्थी की कथा का पाठ करें 
5- ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें 
6- पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी की आरती करें 
7- चंद्रमा के दर्शन करें और अर्घ्य दें 
8- व्रत का पारण करें 
9- क्षमा प्रार्थना करें 

चांद निकलने का टाइम
दृक पंचांग के अनुसार, 10 जून को 08:40 ए एम पर चंद्रोदय होगा। हालांकि, अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। चंद्र दर्शन और पूजा के बाद ही व्रत सम्पूर्ण माना जाता है। 

मंत्र- ॐ गणेशाय नमः

भोग- तिल के लड्डू, मोदक, बादाम की खीर, केला

पुष्प- पीले पुष्प 

उपाय- पूजा के उपरांत चन्द्र देव को दूध का अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय व्रती अपनी निगाहें नीचे रखती हैं और गणेश जी के मन्त्रों का जाप कर खुशहाली की कामना करती हैं। संतान प्राप्ति के लिए व्रती अपनी उम्र के बराबर तिल के लड्डू अर्पित कर भगवान गणेश की पूजा करें। गणेश पूजा के समय अगर पति-पत्नी साथ बैठकर ‘ॐ वक्रतुण्डाय नमः मंत्रोच्चारण का जाप करते हैं, तो वह काफी शुभकारी माना जाता है।

गणेश जी की आरती 

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।    

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