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19 अप्रैल, 2021|4:22|IST

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गंड-मूल नक्षत्रों में जातक के जन्म लेने पर 27 दिन में करा लें नक्षत्र शांति, 5-7 मार्च तक ल रहे हैं मूल

5 मार्च की देर रात से 7 मार्च की देर शाम तक ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र रहेंगे। इस दौरान जन्मे जातक की नक्षत्र शांति जरूरी मानी गई है। ज्योतिष के अनुसार गंड-मूल नक्षत्रों में जन्मे जातक की सेहत, शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव आता है और उसकी स्थितियां उसके पालकों के लिए चिंता का विषय हो सकती हैं। 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, मेष राशि के प्रथम 13 अंश 20 कला में आश्विनी नक्षत्र होता है, कर्क राशि में रहने वाला आश्लेषा नक्षत्र 16 अंश 40 कला से शुरू होकर राशि के अंत तक रहता है, मघा सिंह राशि के 13 अंश 20 कला तक, ज्येष्ठा वृश्चिक राशि के 16 अंश 40 कला से राशि के अंत तक रहता है, धनु में मूल नक्षत्र के 13 अंश 20 कला तक और मीन राशि के रेवती नक्षत्र के 16 अंश और 40 कला से राशि के अंत तक रहता है। वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का महत्वपूर्ण स्थान है। जो बच्चे इस अवधि में पैदा हों, उन्हें चंद्रमा के इन नक्षत्रों में ठीक 27 दिन के बाद शांति जरूर करवानी चाहिए।

ज्योतिष के अनुसार ऐसा नहीं करवाने पर इन गंड-मूल नक्षत्रों में जन्मा बच्चा माता-पिता और कुल के लिए नकारात्मक प्रभाव का हो सकता है। इन नक्षत्र में जन्मे बच्चे के लिए ज्योतिषीय सलाह में 27 दिन तक बच्चे को पिता द्वारा नहीं देखने की बात कही जाती है। प्रसूति स्नान के बाद शुुभ मुहूर्त में गाय, सोने का दान और शांति कार्य संपन्न होने के पश्चात ही पिता बच्चे को देखे। 
बुध के अधीन वाले ज्येष्ठा के चारों चरण कष्टकारी हैं। धर्मराज युधिष्ठिर इसी नक्षत्र में पैदा हुए थे। इस नक्षत्र में जन्म होने पर वह बडे़ भाई, छोटे भाई, माता और खुद को हर तरह का कष्ट देने वाला होता है। केतु के अधीन वाले मूल नक्षत्र के पहले तीन चरणों में पिता, मां और धन की हानि होती है। चौथे चरण में ज्योतिषीय उपाय स्वरूप शांति कराने के बाद ही फायदा होता है।

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  • Web Title:On the birth of the native in the Gand-Mool Nakshatras take Nakshatra Shanti in 27 days the Mool is bringing till March 5-7