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अहंकार नहीं, नम्रता लाएं जीवन में

कई बार हम यह भूल जाते हैं कि सद्गुणों का जिंदगी में होना बहुत जरूरी है। ऐसी जिंदगी, जो अहिंसा से भरपूर हो। ऐसी जिंदगी, जो सेवा-भाव से भरपूर हो।

अहंकार नहीं, नम्रता लाएं जीवन में
Saumya Tiwariसंत राजिंदर सिंह महाराज,नई दिल्लीTue, 27 Sep 2022 11:26 AM

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हर एक इनसान समझता है कि जो वह कर रहा है, वह सबसे अच्छा है । वह जैसी जिंदगी जी रहा है, उससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता। बहुत-सी बार प्रभु की खोज में जो लोग लगे होते हैं, उनके अंदर घमंड आ जाता है। इनसान सोचने लगता है कि मैंने बहुत दान-पुण्य किया है। मैं बहुत से तीर्थ-स्थानों पर गया हूं। मैं बाकायदा अपने धर्मस्थान पर जाता हूं और मैं औरों का खयाल करता हूं।

कई बार हम यह भूल जाते हैं कि सद्गुणों का जिंदगी में होना बहुत जरूरी है। ऐसी जिंदगी, जो अहिंसा से भरपूर हो। ऐसी जिंदगी, जो सेवा-भाव से भरपूर हो। ऐसी जिंदगी, जिसमें हम हर एक के साथ नम्रता से पेश आएं। ऐसी जिंदगी, जिसमें हमारे अंदर सबके लिए प्रेम हो। इनसान यह भूल जाता है कि जब उसके अंदर ‘मैं’ पैदा हो जाती है, तो फिर उसके कदम उसे प्रभु से दूर ले जाते हैं। हमें सभी सद्गुणों को अपने अंदर ढालना है। यह नहीं कि कुछ ढाल लिए और कुछ नहीं। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार ये सब हमें डस लेते हैं। अगर कुछ चीजों को काबू में किया और एक हमारे काबू से बाहर रही, तो हम अपनी मंजिल की तरफ कदम नहीं उठा सकते। महापुरुष बार-बार यही समझाते हैं कि हमें ऐसी जिंदगी जीनी है, जो सद्गुणों से भरपूर हो। कई बार हम सोचते हैं कि हम प्रभु की ओर कदम उठा रहे हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता ।

अगर अहंकार को काबू में न रखा जाए, तो फिर इनसान सच्चाई की जिंदगी नहीं जी पाता क्योंकि जहां पर घमंड आ जाता है, वहां पर आदमी बढ़-चढ़ कर बातें करनी शुरू कर देता है, वह सच्चाई को भी बदल देता है। झूठी चीज को भी ऐसे दिखाएगा, जैसे वह सच्ची हो। उसकी जिंदगी सच्चाई से दूर होनी शुरू हो जाती है। हम में से कई लोग काफी गप्प मारते हैं। करेंगे इतना-सा काम, बात करेंगे, इतना सारा कर लिया। क्यों? क्योंकि उससे हमारा अहंकार बढ़ता है। हम सोचते हैं कि अगर हम औरों को बताएंगे कि हमारे पास बहुत कुछ है, तो वे समझेंगे कि हम बहुत बड़े हैं। तो महापुरुष समझाते हैं कि इनसान अहंकार में सच्चाई से बहुत दूर चला जाता है। अहंकार करके वह किसी की मदद करने के बजाय यही चाहता है कि सब कुछ उसी के लिए हो। हमें इस स्थिति से अपने को बचाना है। अगर हमें प्रभु को पाना है तो अंहकार से अपने से दूर रखना है और नम्रता को अपनाना है।

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