Hindi Newsधर्म न्यूज़Navratri Panchami today worship of Skandmata will give special benefit to its devotees

नवरात्रि पंचमी आज, स्कन्दमाता की पूजा से मिलता है संतान सुख का विशेष फल

मां दुर्गाजी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। इनकी उपासना नवरात्र के पांचवें दिन की जाती है। भगवान स्कन्द कुमार का्त्तितकेय नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर-संग्राम...

Alakha Singh लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली Sun, 29 March 2020 06:50 AM
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मां दुर्गाजी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। इनकी उपासना नवरात्र के पांचवें दिन की जाती है। भगवान स्कन्द कुमार का्त्तितकेय नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर-संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। इन्हीं भगवान स्कन्द की माता होने के कारण मां के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। स्कन्दमाता की उपासना से बालरूप स्कन्द भगवान् की उपासना स्वयमेव हो जाती है। यह विशेषता केवल इन्हीं को प्राप्त है, अत: साधक को स्कन्दमाता की उपासना की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। नवरात्र के पांचवें दिन का शास्त्रों में पुष्कल महत्त्व बताया गया है। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में स्थित होता है।

स्कन्दमाता पूजा मंत्र-
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता सशस्विनी।।

स्कन्दमाता माता पूजा मुहूर्त
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारंभ 28 मार्च दिन शनिवार की देर रात 12 बजकर 17 मिनट से शुरू हो रही है और 30 मार्च दिन रविवार की देर रात 02 बजकर 01 मिनट तक है। स्कंदमाता की आराधना आज रविवार को सुबह होगी। 

 

स्कंदमाता की पूजा से होती है संतान की प्राप्ति-
मान्यता है कि विधि विधान से पूजा कर स्कंदमाता को प्रसन्न करने से संतान की चाह रखने वाले लोगों को संतान की प्राप्ति होती है। शत्रु आपको पराजित नहीं कर पाते हैं। माता मोक्षदायिनी भी हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। साधना में लीन साधक सिद्धि प्राप्ति के लिए भी मां स्कंदमाता की उपासना करते हैं।

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