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हिंदी न्यूज़ धर्मNavratri Kanya Pujan 2022: अष्टमी, नवमी को किया जाता है कन्या पूजन, नोट कर लें डेट, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Navratri Kanya Pujan 2022: अष्टमी, नवमी को किया जाता है कन्या पूजन, नोट कर लें डेट, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Navratri Kanya Pujan : शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 26 सितंबर, 2022 से हो गई है। नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है

Navratri Kanya Pujan 2022: अष्टमी, नवमी को किया जाता है कन्या पूजन, नोट कर लें डेट, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 02 Oct 2022 09:43 PM

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शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 26 सितंबर, 2022 से हो गई है। नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस अष्टमी को दुर्गा अष्टमी या महाअष्टमी भी कहा जाता है। नवमी के दिन नवरात्रि का समापन होता है। नवरात्रि में कन्या पूजन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कन्या पूजन डेट, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त...

अष्टमी- 3 अक्टूबर, 2022 

अष्टमी तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 02, 2022 को 06:47 पी एम बजे

अष्टमी तिथि समाप्त - अक्टूबर 03, 2022 को 04:37 पी एम बजे

  • नवमी- 4 अक्टूबर, 2022

नवमी तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 03, 2022 को 04:37 पी एम बजे

नवमी तिथि समाप्त - अक्टूबर 04, 2022 को 02:20 पी एम बजे

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कन्या पूजन विधि...

  • कन्या पूजन के लिए नौ कन्याओं और एक लड़के की आवश्यकता होती है। नौ कन्याओं को मां का स्वरूप और लड़के को भैरव का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है।
  • अगर आपको नौ कन्याएं नहीं मिल रही हैं तो आप जितनी कन्याएं हैं उनका ही पूजन कर लें। बाकी कन्याओं के हिस्से का भोजन गाय को खिला दें।
  • सबसे पहले कन्याओं और लड़के के पैरों को स्वच्छ जल से धोएं और उन्हें आसन पर बिठाएं।
  • सभी कन्याओं और लड़के को तिलक लगाएं।
  • इसके बाद कन्याओं और भैरव स्वरूप लड़के की आरती करें।
  • कन्याओं को भोजन खिलाएं। कन्याओं को भोजन खिलाने से पहले मंदिर में मां को भोग अवश्य लगा लें।
  • कन्याएं जब भोजन कर लें तो फिर उन्हें प्रसाद के रूप में फल दें और अपने सामर्थ्यानुसार दक्षिणा अवश्य दें।
  • सभी कन्याओं और भैरव स्वरूप लड़के के चरण स्पर्श भी करें।
  • कन्याओं को सम्मान पूर्वक विदा करें। ऐसा माना जाता है कि कन्याओं के रूप में मां ही आती हैं।

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