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26 मार्च, 2020|8:00|IST

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नवरात्र: लंकापति रावण से जुड़ा है मंशा देवी मंदिर का इतिहास

उप्र के बागपत बड़ागांव का प्राचीन मां मंशा देवी मंदिर श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। नवरात्रों में मां मंशा देवी की आराधना करने के लिए जिले के साथ ही दूर-दराज के हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। नव दंपति भी मां की पूजा-अर्चना के बाद ही अपना दांपत्य जीवन शुरू करते हैं।

पंडित रमाशंकर तिवारी ने बताया कि खेकड़ा क्षेत्र का गांव बड़ागांव लंकापति रावण से जुड़ा हुआ है। गांव का प्राचीन मां मंशा देवी मंदिर का इतिहास भी लंकापति रावण से ही जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि मां मंशा देवी की मूर्ति लेकर लेकर रावण लंका जा रहा था। रास्ते में वह किसी कारण से रुका और मां की मूर्ति वहां खड़े एक ग्वाले को दे दी।
ग्वाला मां की मूर्ति संभाल नहीं पाया और उसने मूर्ति को जमीन पर रख दी। इस पर रावण ने मूर्ति को वहीं स्थापित करने की ठानी। उसी दिन से बड़ागांव का यह प्राचीन मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है।

नवरात्र में लगता है मेला, दूर-दराज से आते हैं श्रद्धालु
नवरात्रों में मंदिर पर बड़ा मेला लगता है, जिसमें दूसरे प्रदेशों से भी हजारों श्रद्धालु मां के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा गांव और आसपास के नवदंपति भी अपने नए जीवन की शुरूआत भी मां के दर्शन के बाद ही करते हैं।

मंदिर के पुजारी पंडित रमाशंकर तिवारी ने बताया कि बड़ागांव वाली मईया भक्तों की सभी मुरादों को पूरी करती है। जो भी सच्चे मन से मां की आराधना करता है, मां उसकी झोली खुशियों से भर देती है।

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  • Web Title:Navratri History of Manasha Devi temple is connected with Lanka Ravana