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6 नवंबर, 2020|4:50|IST

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Navratri पांचवां दिन: मां की सेवा से प्रसन्न होती हैं स्कंदमाता, मनोकामना पूरी करने के लिए करें ये विशेष उपाय

नवरात्रि की पांचवी शक्ति देवी स्कंदमाता हैं। स्कंदकुमार इनके पुत्र हैं। देवी मंडपों में बुधवार के दिन स्कंदमाता की आराधना होगी। यह नवरात्रि का मातृ दिवस है। भगवान शंकर की महाशक्ति और स्त्री शक्ति के रूप में देवी पार्वती ही स्कंदमाता हैं। यह सभी मनोकामना को पूरी करती हैं और अपने भक्तों को अभय और सौभाग्य प्रदान करती हैं। इनकी आराधना से पहले भगवान शंकर का ध्यान अवश्य करना चाहिए।

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स्कंदमाता का प्रादुर्भाव
देवी का यह स्वरूप अलौकिक है। दिव्य है। तेजोमयी है। कथा प्रसंग के अनुसार एक असुर था तारकासुर। उसने अजर-अमर होने के लिए घोर तप किया। ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए और पूछा कि तुम्हारी क्या इच्छा है। तारकासुर बोला- मैं चाहता हूं कि मेरी कभी मृत्यु न हो। ब्रह्मा जी ने कहा कि जो इस संसार में आया है, उसका अंत भी निश्चित है। यह तो हो ही नहीं सकता। तारकासुर अपनी जिद पर अड़ा रहा। ब्रह्मा जी भी अडिग रहे। अंत में तारकासुर बोला, ठीक है..यदि मेरी मृत्यु हो तो शंकर जी के शुक्र से उत्पन्न पुत्र द्वारा ही हो। ब्रह्मा जी ने आशीर्वाद दे दिया। तारकासुर बड़ा चालाक था। उसने सोचा कि न कभी शंकरजी विवाह करेंगे और न ही उनके पुत्र होगा न मेरी मृत्यु होगी। यह सोचकर उसने आतंक फैला दिया। सभी देव भगवान शंकर को विवाह के लिए मनाने गए। काफी अनुनय-विनय के बाद भगवान शंकर विवाह के लिए तैयार हुए। पार्वती जी से उनका विवाह हुआ। मांगलिक मिलन से कार्तिकेय ( स्कंदकुमार) का जन्म हुआ और तारकासुर का अंत। स्कंदकुमार की मां होने के कारण ही देवी भगवती स्कंदमाता के रूप में ख्यात हैं।

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स्कंदमाता और रोचक तथ्य
-देवी भगवती पहली गर्भधारण करने वाली और शिशु को जन्म देने वाली स्त्री हैं।
-पहला विवाह भगवान शंकर और पार्वती का हुआ। यहीं से विवाह परंपरा पड़ी
-कार्तिकेय यानी स्कंदकुमार मान्यतानुसार पहले गर्भस्थ शिशु हैं।

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देवी का पांचवा स्वरूप और गर्भ शक्ति
-देवी शास्त्र के अनुसार आद्य शक्ति मां पार्वती नवरात्र की पांचवी शक्ति हैं।
-गर्भ में पहले चार महीने शिशु में शिव तत्व होता है।
-गर्भ के पांचवे महीने से शक्ति तत्व समाहित होता है।
-पांचवे महीने से शिशु का शारीरिक विकास होता है ( उसके बाल आते हैं, वह जंभाई लेता है, करवट लेता है, उसकी हलचल बढ़ती है)
-अर्थात, पांचवे महीने से एक स्त्री मां और शक्ति तत्व से शिशु को अमृत प्राप्त होता है। 
-अतएव, नवरात्र की पंचमी विशेष फल प्रदान करने वाली है और मातृ शक्ति का यह उत्सव है।

सबसे बड़ी पूजा मां की
-पंचमी मातृ दिवस है। इस दिन सबसे बड़ी पूजा यह है कि मां का ध्यान करें
-उनके चरण स्पर्श करें और उनको यथासंभव कुछ उपहार दें
-उनका सदा सम्मान करें और तिरस्कार या अपमान न करें
-मां के सम्मान से बढ़कर कोई पूजा स्वीकार्य नहीं
( यही स्कंदमाता का संदेश भी है)

आज क्या करें
-श्रीदुर्गा सप्तशती का 11 वां अध्याय पढ़ें
-श्री दुर्गाशतनाम का पाठ करें
-घर में तुलसी का पौधा लगाएं
-भगवान शंकर को जल चढ़ाएं ( स्कंदमाता की पूजा एकल न करें। शंकरजी का ध्यान अवश्य करें)

मनोकामना के कुछ उपाय
-मनोकामना करते हुए देवी पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाएं जिसमें आठ या सोलह चूड़ी अवश्य हों ( यह सामान आप अष्टमी या नवमी वाले दिन किसी विवाहित स्त्री को दे दें)
-एक मुट्ठी पीले चावल, दो लोंग के जोड़े, एक सुपारी, पांच छोटी इलायची किसी लाल कपड़े में करके मां भवानी को समर्पित करें
-नवरात्र तक इस पोटली को माता के चरणों में ही रहने दें। 
-फिर, सुपारी को अपनी अलमारी में,लोंग के जोड़े, चावल, पांच इलायची का देवी का प्रसाद स्वरूप घर में इस्तेमाल कर सकते हैं।
-अन्यथा नवमी के दिन इस पोटली को मंदिर में चढ़ा दें या गंगा जी में विसर्जित कर दें। 
( उपरोक्त जो भी आप करना चाहें) 
-इन उपायों के इतर सबसे बड़ी पूजा और उपाय यही है कि आप अपनी मां का चरण वंदन करें।
 

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  • Web Title:Navratri fifth day: Skandmata is pleased with your mother sewa read the 11th path of Durga Saptashati today