Durga Ashtami Puja Vidhi: दुर्गा अष्टमी पूजा कैसे करें? यहां जानें मां के अष्टम स्वरूप मां महागौरी के बारे में संपूर्ण जानकारी

लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली
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Navratri Ashtami Date : इस समय चैत्र नवरात्रि चल रही है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां के 9 रूपों की विधि-विधि से पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के आठवें दिन का विशेष महत्व होता है।

Durga Ashtami Puja Vidhi:  दुर्गा अष्टमी पूजा कैसे करें? यहां जानें मां के अष्टम स्वरूप मां महागौरी के बारे में संपूर्ण जानकारी

Navratri Ashtami : इस समय चैत्र नवरात्रि चल रही है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां के 9 रूपों की विधि-विधि से पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के आठवें दिन का विशेष महत्व होता है। इस दिन को महा अष्टमी या दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है।  नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां दुर्गा के मां महागौरी स्वरूप की उपासना की जाती है। मां महागौरी का रंग पूर्णता गोरा होने के कारण ही इन्हें महागौरी या श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है। इस साल 16 अप्रैल 2024 को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप की पूजा की जाएगी।

मां महागौरी कथा-

मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा करने से धन व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। महागौरी गौर वर्ण की है और इनके आभूषण और वस्त्र स्वेत रंग के हैं। इनकी उम्र आठ साल की मानी गई है। इनकी चार भुजाएं है और वृषभ पर सवार होने के कारण इन्हें वृषारूढा भी कहा जाता है। सफेद वस्त्र धारण करने के कारण इन्हें स्वेतांबरा भी कहा गया है। मां महागौरी देवी पार्वती का एक रूप हैं। पार्वती ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करने के बाद उन्हें पति के रूप में पाया था। कथा है कि एक बार देवी पार्वती भगवान शिव से रूष्ट हो गईं। इसके बाद वह तपस्या पर बैठ गईं। जब भगवान शिव उन्हें खोजते हुए पहुंचे तो वह चकित रह गए। पार्वती का रंग, वस्त्र और आभूषण देखकर उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं। महागौरी करुणामयी, स्नेहमयी, शांत तथा मृदुल स्वभाव की हैं। मां गौरी की आराधना सर्व मंगल मंग्लये, शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्रयंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते..। इसी मंत्र से की जाती है। कहा जाता है कि एक बार भूखा शेर उन्हें निवाला बनाने के लिए व्याकुल हो गया पर उनके तेज के कारण वह असहाय हो गया। इसके बाद देवी पार्वती ने उसे अपनी सवारी बना लिया था। मां के आठवें स्वरूप महागौरी की आराधना करने से धन, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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राजा हिमालय के घर जन्मी थीं माता पार्वती

  • देवी पार्वती का जन्म राजा हिमालय के घर हुआ था। आठ वर्ष की उम्र में ही उन्हें अपने पूर्व जन्म की घटनाओं का आभास हो गया। तब से ही वह भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या शुरू कर दिया था। तपस्या से देवी पार्वती को महान गौरव प्राप्त हुआ था इस लिए उनका नाम महागौरी पड़ा। इस दिन दुर्गा सप्तसती का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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