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30 मई, 2020|11:21|IST

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Navratri 2020: महामारी से बचने को इस मंत्र से करें कलश स्थापना, अकेले करें पूजा, समूह से बचें

navratri 2020

“रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥” (अ॰११, श्लो॰ २९)

अर्थ :- देवि! तुम प्रसन्न होने पर सब रोगों को नष्ट कर देती हो और कुपित होने पर मनोवाञ्छित सभी कामनाओं का नाश कर देती हो। जो लोग तुम्हारी शरण में जा चुके हैं, उन पर विपत्ति तो आती ही नहीं। तुम्हारी शरण में गये हुए मनुष्य दूसरों को शरण देनेवाले हो जाते हैं।

या

ऊं ह्लीं ऊं

या

ऊं ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं चामुण्डायै विच्चे

(श्रीदुर्गा सप्तशती में महामारी का उल्लेख है। महामारी नाश और आरोग्यता के लिए संपूर्ण देवी पाठ है। विधि-विधान से नहीं हो पाए तो सूक्ष्म में यह करें...

1.  देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलकम, सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ ( कीलकम् और कवच का पाठ अधिक करें)

2.  देहि सौभाग्यम-आरोग्यम देहि मे परमं शिवम् का जाप करें

3.  जाप बोलकर नहीं करें क्यों कि कोरोना वायरस फैल रहा है

4.  इस बार मानसिक पूजा करें।

5.  एकांत पूजा करें। सामूहिक एकत्रीकरण से बचें

6.  परिवारीजन दूर-दूर बैठें या घर का मुखिया सभी का नाम लेते हुए घट स्थापना कर दे

7.  किसी भी बीमार व्यक्ति को पूजा में सम्मिलित न करें

हल्दी का पोंछा लगाएं

नवरात्र वातावरण के साथ ही मनसा, वाचा कर्मणा शुद्धि का भी पर्व है। तीन प्रकार के व्रत कहे गए हैं। एक काय यानी शरीर से। दूसरे वचन से। तीसरा कर्म से। मानसिक जाप सर्वश्रेष्ठ है। यूं श्री दुर्गा सप्तशती वाचन का पाठ है। लेकिन वायरस के चलते इसमें हमको कीलकम का पालन करना होगा। श्रीदुर्गा सप्तशती का यह अध्याय गुप्त है। महामारी नाशक है। इसलिए कीलक का पाठ करें। पूजासे पहले हल्दी से घर का पोंछा लगाएं ताकि नकारात्मकता समाप्त हो। हल्दी का सेवन इस दौरान बढ़ा दें।  

मानसिक जाप करें-कम आहार लें

वायरस के चलते धर्माचार्यों की सलाह है कि देवी पाठ बोलकर नहीं वरन मानसिक करें। जितना मानसिक जाप करेंगे, उतना ही स्वास्थ्य की दृष्टि से श्रेष्ठ रहेगा। पीतांबरा, शाकुंभरी, कात्यायनी, चंडिका और कूष्मांडा देवी की विशेष आराधना करें। लेकिन ज्यादा कर्मकांड से बचें। सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखें लेकिन आहार कम लें।

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  • Web Title:Navratri 2020: If you read Sridevi Suktam before the establishment of kalash sthapana then do best do worship alone avoid group