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29 अक्तूबर, 2020|12:36|IST

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Navratri 2020: 100 साल में पहली बार मूर्ति नहीं, कलश के रूप में विराजेंगी मां दुर्गा

navratri 2020 from 17 october

Navratri 2020: नवरात्रों में शहर के दुर्गा पूजा स्थलों पर मूर्ति रूप में विराजमान होती आ रहीं मां दुर्गा इस पर घोटी (कलश) के रूप में पूजी जाएंगी। सरकार से अनुमति मिलने के बाद बंगाली समाज ने दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार दुर्गा पूजन स्थलों पर केवल पंडित और बंगाली समाज के लोग पूजा करेंगे। कोरोना के खतरे को देखते हुए बाहरी लोगों का प्रवेश बंद रहेगा। 100 साल में ऐसा पहली बार हो रहा है जब दुर्गा पूजा में मां की मूर्ति की पूजा और विसर्जन नहीं होगा। नवरात्रि का पर्व 17 अक्टूबर 2020 (शनिवार) से शुरू होगा जो कि 25 अक्टूबर 2020 (रविवार) तक चलेगा।

शहर में पिछले 100 सालों से दुर्गा पूजा होती आ रही है। बंगाली समाज ने दुर्गा पूजा की शुरुआत बिहारीपुर के एक छोटे से मकान से की थी। वक्त के साथ-साथ दुर्गा पूजा का रूप विराट होता चला गया। अब शहर के नौ स्थानों पर भव्य दुर्गा पूजा होती है। बंगाली समाज के लोगों के साथ आम शहरी भी मां दुर्गा का पूजन-अर्चन करते हैं। कोरोना के चलते इस बार धार्मिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के आयोजन पर रोक है। सरकार ने अनलॉक-5 में दुर्गा पूजा और रामलीलाओं में 200 लोगों को जुटने की अनुमति दे दी है। सरकार की अनुमति के बाद आयोजन समितियों के सदस्यों ने बात करके तय किया कि इस बार मां का घोटी रखकर पूजन किया किया। आयोजन स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। 

अलग-अलग प्रहर में पूजा करेंगे समितियों के सदस्य
कोरोना को देखते हुए दुर्गा पूजा समितियों के सदस्य पूजन स्थल पर एक साथ नहीं जाएंगे। अलग-अलग परिवार, अलग-अलग वक्त पर आयोजन स्थलों पर पहुंचेंगे। केवल पंडित जी को कार्यक्रम स्थल पर रुकने की अनुमति होगी। सभी पूजा स्थलों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा साथ ही हैंड सेनेटाइजर का इंतजाम रहेगा। आयोजन स्थल पर जाने के लिए मास्क का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया है। 

ऐन मौके पर अनुमति मिलने के कारण नही हो पाएंगे भव्य कार्यक्रम 
शहर की सभी दुर्गा पूजाएं अब तक भव्य रूप में होती रही हैं। कार्यक्रम स्थलों पर मां की मूर्ति स्थापित करने के बाद बंगाली समाज के लोग पूरे विधि विधान से पूजन करते हैं। रोजाना शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इस बार कोरोना के चलते लोगों को आयोजन की अनुमति मिलने की उम्मीद नहीं थी। ऐसे में समय रहते तैयारियां शुरू नहीं हो पाईं। आयोजन समाज के आपसी सहयोग से होते हैं। कोरोना के चलते लोग एक दूसरे से मिलने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे में बैठक व बाकी तैयारियां नहीं हो पाईं। 

200 लोगों की संख्या तय करना बड़ी चुनौती 
आयोजकों का कहना है कि अगर कार्यक्रम बड़े स्तर पर किए जाएंगे तो किसी भी पूजा परिसर में 200 लोगों की संख्या को नियंत्रित कर पाना बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में संक्रमण का खतरा होगा। इसलिए यह तय किया गया है कि कार्यक्रम सूक्ष्म रूप में होगा। सब जगह मां घोटी रखकर पूजी जाएंगी। ऐसे में पूजन की परंपरा भी कायम रहेगी और भीड़ भी नहीं जुटेगी। 

आयोजक बोले
100 साल में ऐसा पहली बार होगा जब बरेली में दुर्गा पूजा धूमधाम से नहीं होगी। शायद मां की यही इच्छा है। हम घोटी रखकर मां का पूजन करेंगे। जंक्शन के रेलवे मनोरंजन सदन में इस बार कार्यक्रम की भव्यता कम होगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी नहीं किया जाएगा। 
- ध्रुव चटर्जी, आयोजक 

दुर्गा पूजा इस बार भी होगी। इस बार हम मां का कलश के रूप में पूजन करेंगे। मंदिर और आयोजन स्थल पर भीड़भाड़ नहीं होगी। भक्तगण शांति और सादगी से पूजन करेंगे। इज्जतनगर के रोड नंबर चार पर होने वाले आयोजन में इस बार मां की मूर्ति स्थापना नहीं होगी। 
- नंदन चक्रवर्ती, आयोजक

रामपुर गार्डन की दुर्गाबाड़ी में हर बार पूजन पूरी भव्यता से होता था। इस बार मां का कलश के रूप में पूजन किया जाएगा। केवल बंगाली समाज के लोग पूजन में शामिल होंगे। बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। कोरोना को देखते हुए हम सभी सावधानियां बरतेंगे। 
- डॉ. सुजॉय मुखर्जी, आयोजक 

इज्जतनगर के दादू जी के मंदिर में हम पूरे विधि विधान से पूजन करेंगे। आयोजक स्थल पर मां मूर्ति के रूप में विराजमान न होकर कलश के रूप में विराजमान रहेंगी। आयोजन समिति के सदस्य अलग-अलग वक्त अपने परिवार के साथ जाकर मां का पूजन करेंगे।
- श्रीकांत घोष, आयोजक 

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  • Web Title:Navratri 2020: For the first time in 100 years no idol mother Durga will worshiped as Kalash