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पंचांग-पुराणNavratri 2019: काल से रक्षा करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि

स्मार्ट टीम,नई दिल्लीPublished By: Anuradha
Fri, 04 Oct 2019 12:36 PM
Navratri 2019: काल से रक्षा करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि

नाम से अभिव्यक्त होता है कि मां दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। नाम से ही जाहिर है कि इनका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि। काल से भी रक्षा करने वाली यह शक्ति है।  इन देवी के तीन नेत्र हैं। 

Navratri 2019: नवरात्रि के सातंवे दिन होगी मां कालरात्रि, इनकी उपासना से प्राणी रहता है भय मुक्त

ये तीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं। इनकी सांसों से अग्नि निकलती रहती है। ये गर्दभ की सवारी करती हैं। ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को वर देती है। दाहिनी ही तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। यानी भक्तों को हमेशा निडर, निर्भय रहने का आशीर्वाद देती देती हैं। बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खडग है। 

भगवान शंकर ने एक बार देवी को काली कह दिया, कहा जाता है, तभी से इनका एक नाम काली भी पड़ गया। दानव, भूत, प्रेत, पिशाच आदि इनके नाम लेने मात्र से भाग जाते है। इनके शरीर का रंग काला है। मां कालरात्रि के गले में नरमुंड की माला है। कालरात्रि के तीन नेत्र हैं और उनके केश खुले हुए हैं। मां गर्दभ (गधा) की सवारी करती हैं। मां के चार हाथ हैं, एक हाथ में कटार और एक हाथ में लोहे का कांटा है। मां दुर्गा की सातवीं शक्ति मां कालरात्रि का स्वरूप जितना डरावना है, वह भक्तों के लिए उतनी ही निर्मल हैं। भगवान शिव को शक्ति देकर संपूर्ण करने वाली मां काली देवी अपने भक्तों की रक्षा काल से भी करती हैं। इनका पूजन करने से आसुरी शक्तियां पास भी नहीं भटकती हैं।

 कालरात्रि अपने भक्तों पर पुत्रों के समान कृपा बरसाती हैं।   मां भक्तों की ग्रहों संबधित समस्याओं का निवारण करने के  साथ ही शुभ फल प्रदान करने वाली हैं। मां कालरात्रि का पूजन करने के साथ ही इस रात्रि संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। ऐसा करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। 
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। 
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

इनका रूप भले ही भयंकर हो लेकिन ये सदैव शुभ फल देने वाली मां हैं। इसीलिए ये शुभंकरी कहलाईं अर्थात् इनसे भक्तों को किसी भी प्रकार से भयभीत या आतंकित होने की कतई आवश्यकता नहीं। उनके साक्षात्कार से भक्त पुण्य का भागी बनता है।  कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुलने लगते हैं और तमाम आसुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती हैं। इसलिए दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत उनके स्मरण से ही भाग जाते हैं। 
ग्रह बाधाओं को भी करतीं दूर : मां कालरात्रि ग्रह बाधाओं को भी दूर करती हैं और अग्नि, जल, जंतु, शत्रु और रात्रि भय दूर हो जाते हैं। इनकी कृपा से भक्त हर तरह के भय से मुक्त हो जाता है।
नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। मां कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी कहा जाता है। कहा जाता है कि देवी दुर्गा ने असुर रक्तबीज का वध करने के लिए कालरात्रि को अपने तेज से उत्पन्न किया था। इनकी उपासना से प्राणी सर्वथा भय मुक्त हो जाता है। 

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