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ब्रह्मांड की हर वस्तु में व्याप्त है मां कुष्मांडा का तेज

नवरात्र में मां दुर्गा के चौथे स्वरूप की आराधना मां कुष्मांडा के रूप में की जाती है। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब मां ने ब्रह्मांड की रचना की। ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण मां को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया। मां को सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदि शक्ति कहा गया है।

पवित्र मन से मां की आराधना करना चाहिए। मां की आराधना से रोग-शोक का नाश होता है और आयु, यश, बल, आरोग्य की प्राप्ति होती है। मां का वास सूर्यलोक में है। सूर्यलोक में रहने की क्षमता केवल मां में ही है। ब्रह्मांड की समस्त वस्तुओं और प्राणियों में मां का ही तेज व्याप्त है। मां का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। मां कुष्मांडा अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। मां की कृपा से उन्नति के नए मार्ग प्राप्त होते हैं। माता की आराधना से शांति की प्राप्ति होती है। माता की पूजा के पश्चात भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Navaratri
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