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गोल मंदिर : मां के दिव्य स्वरूप के दर्शन को उमड़ते हैं भक्त, हर मनोकामना होती है पूरी

गोल मंदिर जयदेवी नगर में स्थित है। हापुड़ रोड, दिल्ली रोड, गढ़ रोड, मवाना रोड आदि सभी मार्गों से हापुड़ अड्डा या नई सड़क तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। ऑटो रिक्शा, थ्री-व्हीलर, रिक्शा आदि परिवहन के साधन सहज एवं सुलभ हैं।.

कमल के आकार का है डिजाइन
मां दुर्गा देवी के दर्शन करने के बाद भक्तों का यहां बहुत शांति मिलती है। पुजारी बताते हैं कि देवी के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता। सच्चे मन से देवी की मूर्ति देखने पर उन्हें मां के अलग-अलग रूप का अहसास होता है। मंदिर में माता के शृंगार की अपार महिमा है। नवरात्र में माता के हर रूप का अलग शृंगार होता है। मां के मस्तक पर विराजित मुकुट में चांदी का रत्न व नग जड़ित चंद्रमा भव्य छटा बिखेरता है। .

मंदिर को विशेष स्वरूप देने वाले आर्किटेक्ट जागेश शर्मा कहते हैं मंदिर गोलाई में कमल पुष्प की पंखुड़ियों के रूप में डिजाइन किया गया है। 70 फुट व्यास का गुंबद है, ऊंचाई करीब सवा सौ फुट है। स्वागत द्वार की बनावट भी आकर्षक है।

शास्त्रीनगर और जयदेवी नगर की सीमा पर मां दुर्गा का गोल मंदिर अपने आकार और मनोकामना जल्द पूरी होने की वजह से प्रसिद्धि हासिल किए हुए हैं। इसे देखने के लिए आसपास के क्षेत्र के काफी लोग आते हैं। सच्चे मन से की गई मनोकामना देवी मां जरूर पूरी करती हैं। नवरात्र में तो यहां मां के भक्तों की भीड़ काफी गुना बढ़ जाती है।

मंदिर की स्थापना : मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित गोल मंदिर की स्थापना 1965 में की गई थी। लोगों के मुताबिक शास्त्रीनगर में छीतर सिंह नाम के ब्राह्मण रहते थे। एक दिन ब्राह्मण की पत्नी शांति देवी को मां दुर्गा ने दर्शन दिए और मंदिर बनाने को कहा। माता की असीम कृपा समझ फिल्म निर्माता व निर्देशक स्व. देवीशरण शर्मा की पत्नी शांति देवी ने खुद ही मंदिर का निर्माण किया। उनके पोते व मैनेजिंग ट्रस्टी राजीव गौड़ बताते हैं जगतगुरु श्रीकृष्ण बोध आश्रम जी महाराज ने सन् 1965 में इस मंदिर में प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी। यहां विधि-विधान से देवी दुर्गा की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ मूर्ति स्थापित की गई। .

मान्यता: शहर और आसपास के क्षेत्र में पहला गोल आकार का मंदिर होने के कारण श्रद्धालु आने शुरू हो गए थे। यहां आकर उन्होंने देवी के सामने अपने परिवार के लोगों के साथ मनोकामना मांगी, तो उनकी मनोकामना जल्द पूरी भी हुई। इससे गोल मंदिर की प्रसिद्धि भी बढ़ने लगी। मंदिर के अंदर कल्पवृक्ष भी लगवाया गया। इस पर कलावा बांधते हुए देवी के भक्तों की मनोकामना पूरी होने लगी तो गोल मंदिर की प्रसिद्धि और ज्यादा बढ़ गई। हर साल इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। नवरात्र में तो यहां उत्सव सा माहौल होता है। यहां आने वाले देवी के भक्त उन्हें प्रसाद जरूर चढ़ाते हैं। चुनरी, नारियल, शृंगार का सामान व प्रसाद के साथ दीप प्रज्ज्वलित करने से देवी प्रसन्न होती हैं। उसके बाद देवी का खुली आंखों से नमन करने से देवी प्रसन्न होती हैं और जल्द ही अपने भक्त की मनोकामना पूरी करती हैं। .

हर मनोकामना होती है पूरी: मान्यता है कि जो भी भक्त मां का श्रृंगार करवाता है व चोला भेंट करता है उस पर मां की विशेष कृपा होती है। दीपक जलाकर सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मां की कृपा जरूर बरसती है। आज भी कई ऐसे भक्त आते हैं जो यहां छात्र के रूप में आते थे आज बड़ा मुकाम हासिल कर चुके हैं।.

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  • Web Title:Navaratri 2019: Gol Mandir-Devotees come to see Divine nature of maa
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