Naraka Chaturdashi or Roop Chaudas date time subh muhurt of puja katha puja vidhi story in hindi - नरक से मुक्ति दिलाती है नरक चतुर्दशी, जानें इस दिन क्या करने से होगी शुभ फल की प्राप्ति DA Image
19 नबम्बर, 2019|7:09|IST

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नरक से मुक्ति दिलाती है नरक चतुर्दशी, जानें इस दिन क्या करने से होगी शुभ फल की प्राप्ति

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नरक चतुर्दशी 27 अक्तूबर को है। इसे रूप चतुर्दशी के साथ-साथ नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि के अंत में जिस दिन चंद्रोदय के समय चतुर्दशी हो, उस दिन सुबह दातुन आदि करके निम्नलिखित श्लोक का जाप करें-‘यमलोकदर्शनाभवकामोअहमभ्यंकस्नानं करिष्ये’-कह कर संकल्प करें।

शरीर में तिल के तेल आदि का उबटन लगा लें। हल से उखाड़ी मिट्टी का ढेला, अपामार्ग आदि को मस्तक के ऊपर बार-बार घुमाकर शुद्ध स्नान करें। वैसे तो कार्तिक स्नान करने वालों के लिए- ‘तैलाभ्यंग तथा शययां परन्ने कांस्यभोजनम्। कार्तिके वर्जयेद् यस्तु परिपूर्णव्रती भवेत’ के अनुसार वर्जित है, निषेध है, लेकिन - ‘नरकस्य चतुर्दश्यां तैलाभ्यगं च कारयेत्। अन्यत्र कार्तिकस्नायी तैलाभ्यगं विवर्जयेत्॥’ के अनुसार नरक चतुर्दशी में तेल लगाना अति आवश्यक है।

सूर्योदय से पूर्व नहाना आयुर्वेद की दृष्टि से अति उत्तम है। जो ऐसा हर दिन नहीं कर पाते, उन्हें कम से कम आज के दिन तो सूयार्ेदय के पूर्व अवश्य ही नहा लेना चाहिए। वरुण देवता को स्मरण करते हुए स्नान करना चाहिए। नहाने के जल में हल्दी और कुमकुम अवश्य डालना चाहिए। संभव हो तो नए वस्त्र पहनने चाहिए। फिर यम तर्पण करना चाहिए। शाम को यमराज के लिए दीपक अवश्य जलाना चाहिए।

इस दिन कृष्ण भगवान ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। साथ ही, राजा बलि को भगवान विष्णु ने वामन अवतार में हर साल उनके यहां पहुंचने का आशीर्वाद दिया था। 

नरक चतुर्दशी का महत्व बताती एक कथा धर्मात्मा राजा रन्तिदेव से जुड़ी है। उन्होंने सदैव धर्म के अनुसार राज्य किया, लेकिन एक दिन उनके द्वार से एक गरीब आदमी अन्नदान न मिलने से भूखा लौट गया। इस बात का राजा को पता भी नहीं चला। फलस्वरूप जिस दिन उनकी मृत्यु हुई, उनके पास यमदूत खडे़ हो गए।

राजा चौंक गए, पूछा कि जीवनभर कोई पाप तो हुआ नहीं फिर आप क्यों आ गए? यमदूत ने कहा कि गरीब आपके यहां से भूखा लौट गया था। राजा तपस्वी थे। यमदूत से एक साल का समय मांगा। ऋषियों ने सलाह लेकर उन्होंने नरक चतुर्दशी का व्रत किया और भूखों को भोजन करा अपने अपराधों के लिए उनसे क्षमा मांगी। इससे राजा पापमुक्त होकर विष्णु लोक में गए। इस तरहपाप व नरक से मुक्ति दिलाता है नरक चतुर्दशी का व्रत।

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