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31 अक्तूबर, 2020|6:58|IST

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मुहर्रम: जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने का नाम है कर्बला

muharram

इस्लामी महीने 61 हिजरी में यजीद ने इमाम हुसैन को कत्ल करने के लिए इराक के शहर कर्बला में एक लाख लोगों का लश्कर भेजा। हुसैन इब्ने अली, यजीद से जंग करने के इरादे से नहीं निकले थे। वह परिवार की औरतों, बच्चों व अन्य लोगों के साथ सफर पर थे। यजीद चाहता था कि हुसैन जुल्म व हलाल को हराम करने में उनका साथ दें लेकिन उन्होंने मना कर दिया। 2 मुहर्रम को इमाम हुसैन जब कर्बला पहुंचे तो वहां उनको यजीद के लश्कर ने घेर लिया।

यजीद के सेनापति उमर इब्ने साद ने इमाम हुसैन से कहा कि अगर वह यजीद की बात नहीं मानेंगे तो उनके बच्चों, दोस्तों, रिश्तेदारों सबको कत्ल कर दिया जाएगा। इमाम हुसैन ने रसूल के इस्लाम को बचाने के लिए यजीद की बात नहीं मानी।

सात मुहर्रम को इमाम हुसैन पर पानी बंद कर दिया गया। बच्चे और औरतें तीन दिन तक गर्मी व प्यास से तड़पते रहे। इसमें इमाम हुसैन का 6 महीने का मासूम बच्चा अली असगर भी शामिल था।

दस मुहर्रम को इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों को हक पर कुर्बान कर दिया लेकिन जुल्म के आगे नहीं झुके। इमाम हुसैन ने एक दिन में 72 लाशें उठाईं। इसी याद में पूरी दुनिया में अजादारी मनाई जाती है। 

मौलाना सैयद सफदर हुसैन जैदी से बातचीत पर आधारित लेख।  

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  • Web Title:Muharram 2019 is the first month of the Islamic calendar know what is karbala