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व्यक्ति की जन्म राशि तय करता है चंद्रमा

चंद्रमा का भारत में पौराणिक महत्व तो है ही जन्म कुंडली में भी बहुत ही महत्व है। यह नवग्रह में सूर्य के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। हालांकि पृथ्वी के सबसे नजदीक होने के कारण यह मनुष्य पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है।

जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से ही किसी भी मनुष्य की जन्म राशि और स्वभाव तय होता है, क्योंकि चंद्रमा को मन का स्वामी कहा जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यदि जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति ठीक नहीं होती है तो मन और मस्तिष्क की परेशानी आ सकती है।
किसी भी मनुष्य के जन्म के समय जो जन्म कुंडली बनाई जाती है, उसमें चंद्रमा सभी बारह भावों में जिस नंबर के भाव में विराजमान होता है तो 12 राशियों में से उसी नंबर की राशि उस मनुष्य की होती है। इसके साथ ही जन्म लग्न के साथ चंद्र लग्न की कुंडली भी बनाई जाती है।

चंद्रमा सभी नौ ग्रहों में सबसे छोटा माना जाता है, लेकिन वह पृथ्वी के सबसे नजदीक होने के साथ ही सबसे तेजगति से चलने वाला ग्रह भी है। चंद्रमा के सबसे तेज गति से चलने के कारण ही सभी ज्योतिषीय गणनाओं में इसकी उपयोगिता है। चंद्रमा के बारे में कहा जाता है कि जन्म के समय वह जिस नक्षत्र में होता है, उस नक्षत्र के स्वामी से जी ग्रह की दशा प्रारंभ  होती है। ज्योतिषीय गणना में शुभ और अशुभ समय देखने के लिए दशा, अंतरदशा और प्रत्यंतर दशा निकाली जाती है। यह सब चंद्रमा से ही निकाली जाती है।

भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का है पौराणिक महत्व
ज्योतिषीय महत्व के अलावा चंद्रमा का पौराणिक महत्व भी है। पुराणों में चंद्रमा की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय निकले 14 रत्नों में एक के रूप में की जाती है। वह लक्ष्मी जी के साथ समुद्रमंथन से ही प्रकट हुए। शिवजी ने समुद्रमंथन के समय हलाहल विष पिया था, इसलिए उन्होंने शीतलता के लिए चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया।

मान्यता है कि जब समुद्रमंथन के समय विष्णु भगवान मोहिनी अवतार धारण कर देवताओं और दानवों को अलग-अलग बैठाकर देवताओं को अमृत का पान करा रहे थे तो राक्षसों में से एक देवताओं की कतार में बैठ गया था। सूर्य और चंद्रमा ने उसे देख लिया, उन्होंने शोर मचाया तो मोहिनी अवतार लिए विष्णुजी ने राक्षस का सिर धड़ से अलग कर दिया।
 
चंद्रमा का पृथ्वी पर पड़ता है जबरदस्त प्रभाव
चंद्रमा की स्थिति का पृथ्वी पर सीधा प्रभाव पड़ता है। चंद्रमा की किरणों के कारण ही पृथ्वी पर ज्वार भाटा आता है। चंद्रमा का शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में प्रभाव रहता है। मनुष्य के मन का स्वामी होने के कारण चंद्रमा की स्थिति से ही मनुष्य का स्वभाव जाना जाता है। जन्म कुंडली में यदि चंद्रमा उच्च का है तो मनुष्य के मन में सकारात्मक विचार आते हैं।

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  • Web Title:Moon determines the birth sign of a person
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