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पापी को भी मोक्ष का अधिकारी बना देता है यह व्रत

लाइव हिन्दुस्तान टीम,मेरठPublished By: Arpan
Wed, 09 May 2018 08:29 PM
भगवान विष्णु
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भगवान विष्णु

ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित अपरा एकादशी को अचला एकादशी, भद्रकाली एकादशी और जलक्रीड़ा एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। अपार धन देने वाली इस एकादशी पर व्रत रखने से यश की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि जो भी मनुष्य अपने भूतकाल और वर्तमान के पापों से भय रखता है, उसे अपरा एकादशी का व्रत अवश्य रखना चाहिए। मान्यता है कि इसी दिन मां भद्रकाली प्रकट हुई थीं।

अपरा एकादशी
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अपरा एकादशी

यह उपवास मोक्ष प्राप्त करने के तरीकों में से एक माना जाता है। इस एकादशी को पापों का अंधकार दूर करने वाला सूर्य भी कहा गया है। मान्यता है कि इस व्रत को धारण करने से ब्रह्महत्या, परनिंदा जैसे कर्मों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत में भगवान विष्णु का धूप, दीप, नेवैद्य और श्वेत पुष्पों से पूजन करें। रात्रि में प्रभु नाम का संकीर्तन करें। यह व्रत सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय होने तक रखा जाता है। इस व्रत में चावल और तेल का उपयोग न करें। इस दिन तुलसी से पत्ते न तोड़ें। विष्णु सहस्रनाम का श्रवण करें। इस दिन व्रत रखने से बड़े से बड़ा पापी भी मोक्ष का अधिकारी बन सकता है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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