Mohini Ekadashi - इस दिन धरा श्रीहरि ने मोहिनी रूप, देवताओं को कराया था अमृत पान DA Image

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इस दिन धरा श्रीहरि ने मोहिनी रूप, देवताओं को कराया था अमृत पान

वैशाख माह में शुक्लपक्ष एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन ही भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था। समुद्र मंथन में प्राप्त हुए अमृत को देवताओं में वितरित करने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था। मोहिनी रूप धारण कर भगवान विष्णु ने असुरों को अपने मोहपाश में बांध लिया और अमृत का पान देवताओं को करा दिया। इसी कारण इस एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा गया।

भगवान श्रीराम और महाभारत काल में धर्मराज युद्धिष्ठिर ने भी इस एकादशी का व्रत विधि विधान से किया था। यह एकादशी सभी पापों को हरने वाली है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य सभी दुखों से दूर होकर मोहजाल से मुक्त हो जाता है। इस व्रत के प्रभाव से चिंताएं और मोहमाया का प्रभाव कम होता है। मन शुद्ध होता है। हर तरह की दुर्घटनाओं से रक्षा होती है। इस दिन प्रातः उठकर स्नान करने के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें। भगवान श्रीराम की आराधना करें। भगवान को पीले फूल,पंचामृत तथा तुलसी दल अर्पित करें। निर्धन को अन्न का दान करें। इस दिन क्रोध न करें, असत्य न बोलें। इस व्रत में अन्न वर्जित है। इस व्रत में दशमी तिथि से ही व्रती को नियमों का पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना करें। रात्रि के समय श्री हरि का स्मरण करते हुए, भजन कीर्तन करते हुए जागरण करें। द्वादशी के दिन एकादशी व्रत का पारण किया जाता है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Mohini Ekadashi