Mitra Saptami 2019: Today is Mitra Saptami Surya Dev inspires like friend know the importance of surya arghya - Mitra Saptami 2019: आज है मित्र सप्तमी, ये है सूर्य को अर्घ्य देने का तरीका DA Image
10 दिसंबर, 2019|1:27|IST

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Mitra Saptami 2019: आज है मित्र सप्तमी, ये है सूर्य को अर्घ्य देने का तरीका

surya dev

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मित्र सप्तमी कहते हैं, जो इस वर्ष 3 दिसंबर को है। सभी ग्रहों के राजा हैं सूर्य। इनका एक नाम मित्र भी है, जो मित्रों के समान प्रेरणा देता है, सकारात्मकता प्रदान करता है। सूर्य, विष्णु के दक्षिण नेत्र और अदिति-कश्यप के पुत्र हैं। सनातन धर्म में पंचदेव पूजा का विधान है। गणेश, दुर्गा, शिव व श्रीहरि तो भारी तपस्या के बाद दर्शन देते हैं, पर सूर्य तो प्रत्यक्ष देवता हैं। सूर्य ही हर सुबह ब्रह्मा, दोपहर विष्णु और शाम को रुद्र रूप धारण करते हैं। मित्र सप्तमी को जब सूर्य देव की लालिमा फैल रही हो, तो मुंडन करा नदी या सरोवर में जाकर स्नान करना चाहिए। इस दिन सूर्य का षोडशोपचार पूजन कर उपवास रखना चाहिए। उपवास में मीठे फल खा सकते हैं। अष्टमी को दान आदि कर शहद मिला मीठा भोजन करना चाहिए।

सुबह एक पैर के आधा भाग को उठाकर रक्त चंदनादि से युक्त लाल पुष्प, चावल आदि तांबे के पात्र में रख कर सूर्य को हाथ की अंजलि से तीन बार जल में ही अर्घ्य देना चाहिए। दोपहर को खडे़ होकर अंजलि से केवल एक बार जल में और सायंकाल में साफ-सुथरी भूमि पर बैठकर तीन बार अंजलि में जल भरकर अर्घ्य देना चाहिए। ध्यान रखें, जल पैरों का स्पर्श न करे।

आज के दिन तेल और नमक का त्याग करना चाहिए। सूर्य प्रसन्न होकर लंबी आयु, आरोग्य, धन, उत्कृष्ट संतान, मित्र, तेज, वीर्य, यश, कांति, विद्या, वैभव और सौभाग्य प्रदान करते हैं। जिन लोगों का मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु लग्न है, उन्हें तो निश्चित ही सूयार्ेपासना करनी चाहिए। साथ ही जिनकी कुंडली में सूर्य अपनी नीच राशि तुला में हैं, अर्थात जिनका जन्म 17 अक्तूबर से 16 नवंबर के बीच हुआ है, उन्हें सूर्य की पूजा जन्मकुंडली अनुसार शुभ होने पर अवश्य करनी चाहिए। साथ ही, जिनकी कुंडली में सूर्य राहु-केतु, शनि के साथ हैं, उन्हें भी नियम से सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। रविवार और भगवान सूर्य की प्रिय तिथि सप्तमी को नीले रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। स्मरण रहे, महर्षि अगस्त्य के कहने पर आदित्य हृदय स्तोत्र का लगातार तीन बार पाठ करने के कारण ही सूर्यवंशी राम लंकापति रावण का वध करने में सफल हुए। इनके बहुत से मंत्र हैं, लेकिन- ‘ओम घृणि सूर्य आदित्य ओम' का अधिकांश सनातनधर्मी जाप करते हैं।

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