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25 जनवरी, 2020|8:32|IST

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Margashirsha Purnima 2019: इस दिन से हुई थी सतयुग काल की शुरुआत, जानें इसका महत्व, पूजन विधि और शुभ समय

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कहते हैं जीवन संघर्षों से भरा हुआ है। ऐसे में प्रभु भक्ति करके लोग मोक्ष प्राप्ति करना चाहते हैं। पौराणिक कहानी के अनुसार माना जाता है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सच्चे मन से पूजा करने से इसी जन्म में उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं, पौराणिक धर्म ग्रंथो के अनुसार इस दिन सतयुग काल की शुरुआत हुई थी।

 

हिंदू पंचाग के अनुसार मास की 15वीं और शुक्लपक्ष की अंतिम तिथि जिस दिन चंद्रमा आकाश में पूरा होता है, उस दिन को पूर्णिमा या पूर्णमासी कहते हैं। हर महीने की पूर्णिमा को कोई न कोई पर्व अथवा व्रत अवश्य मनाया जाता हैं। लेकिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा का खास महत्व होता है। इस बार मार्गशीर्ष पूर्णिमा गुरुवार 12 दिसंबर 2019 को है। 


मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व
पुरानी मान्यता के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर तुलसी की जड़ की मिट्टी से पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करने से भगवान विष्ण की विशेष कृपा मिलती है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सूर्य और चंद्रमा ठीक आमने-सामने होते हैं। इस दिन चंद्रमा का प्रभाव मनुष्य पर सबसे अधिक होता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन गीता पाठ करने का भी महत्व है। कहा जाता है इस दिन गीता पाठ करने से पितरों को तृप्ति मिलती है।

 

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पूजा के लिए शुभ समय  
समय के अनुसार बुधवार 11 दिसंबर 2019 को रात्रि 11 बजकर एक मिनट 21 सेकेंड से पूर्णिमा आरम्भ हो जाएगी और गुरुवार 12 दिसबंर 2019 को रात्रि 10 बजकर 44 मिनट 24 सेकेंड पर पूर्णिमा समाप्त हो जाएगी। लेकिन 12 दिसबंर को ही पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा और पूजा, दान आदि भी किया जाएगा।

 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन व्रत और पूजा करने से सुख की प्राप्ति होती है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन। भगवान नारायण की पूजा की जाती है। इसलिए सुबह उठकर नरायण भगवान का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद स्नान कर साफ कपड़े पहने और ऊँ नमोः नारायण कहकर आह्वान करें। पूजा स्थान पर भगवान को फूल,अर्पन, फल आदि चढ़ा कर पूजा करें। इसके बाद पूजा स्थान पर वेदी बनाएँ और हवन के लिए उसमे अग्नि जलाएं। हवन तेल, घी और बूरा आदि की आहुति दें। हवन खत्म होन के बाद भगवान का ध्यान करें। रात को नारायण भगवान के मूर्ति के पास ही सोये। दूसरे दिन स्नान करें और पूजा कर जरुरतमंद व्यक्ति और ब्राह्मण को भोजन कराए। इसके बाद दान-दक्षिणा देकर अपना व्रत खोलें।

 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा को क्यों कहते हैं बत्तीसी पूर्णिमा
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर तुलसी की जड़ की मिट्टी से पवित्र सरोवर में स्नान करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। स्नान करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन आप जो भी दान करते हैं उसका फल अन्य पूर्णिमा की अपेक्षा 32 गुना अधिक प्राप्त होता है। इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा कहा जाता है।
 

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  • Web Title:Margashirsha Purnima 2019 know significance pujan vidhi and mythological facts