Hindi Newsधर्म न्यूज़Malavya Rajyoga Significance : Malavya rajyog kab banta hai benefits of malavya rajyog

Malavya Rajyoga :मालव्य राजयोग कब बनता है? जानें इसका शुभ-अशुभ प्रभाव

Malavya Rajyoga Significance : वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र के वृष, तुला या अपनी उच्च राशि मीन में प्रवेश करने से मालव्य राजयोग बनता है। जिसका शुभ-अशुभ प्रभाव 12 राशियों पर भी होता है।

Arti Tripathi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीTue, 4 June 2024 08:36 AM
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Malavya Rajyoga 2024 : वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में बुध, मंगल , वृहस्पति, शुक्र और शनि के साथ आने से कई अद्भुत संयोग का निर्माण होता है। कुंडली में पंच माहपुरुष राजयोग का बड़ा महत्व है। इन पंच महापुरुष योग में मालव्य राजयोग, हंस योग, रूचक योग, भद्र योग और हंस योग शामिल हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब कुंडली के पहले चौथे, सातवें, दशवें भाव में शुक्र का अपनी स्वराशि वृष , तुला या अपनी उच्ची राशि मीन में प्रवेश करते हैं, तो इससे मालव्य राजयोग का निर्माण होता है। ज्योतिष में मालव्य राजयोग का बेहद शुभ फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे शुभ प्रभाव से जातक साहसी, पराक्रमी, सुंदर और सौभाग्यशाली होता है। ऐसे लोगों को समाज में खूब मान-सम्मान मिलता है। हर क्षेत्र में भाग्य साथ देता है और जीवन में कभी भी धन की तंगी का सामना नहीं करना पड़ता है। आइए जानते हैं मालव्य राजयोग के शुभ-अशुभ प्रभाव...

मालव्य राजयोग के लाभ :

-मान्यता है कि कुंडली के प्रथम भाव में मालव्य राजयोग के निर्माण से धन,सुख-सौभाग्य और सामाजिक पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। 

-कुंडली के चौथे भाव में मालव्य राजयोग के बनने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और भौतिक सुख-सुविधाओं में जीवन व्यतीत होती है। धन-ऐश्वर्य में वृद्धि होती है।

-सातवें भाव में मालव्य राजयोग के निर्माण से फिल्म, फैशन , कॉस्मेटिक, ब्यूटीशियन, संगीतकार, मॉडलिंग इंडस्ट्री में अपार सफलता मिलती है।

-कुंडली के दसवें भाव में मालव्य योग से सिनेमा, बिजनेस, एविऐशन फील्ड में धन कमाने के कई सुनहरे मौके मिलते हैं। इस क्षेत्र से जुड़े लोग करियर में बड़ी कामयाबी हासिल करते हैं।

-मान्यता है कि मालव्य राजयोग से व्यक्तित्व में निखार आता है। ऐसे जातक दिखने में बुद्धिमान,खुले विचारों वाले, आकर्षक, प्रशंसनीय और भाग्यशाली होते हैं।

मालव्य राजयोग के अशुभ प्रभाव : कुंडली में मालव्य राजयोग के अशुभ होने से जातक को जीवन में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

-मान्यता है कि कुंडली में अशुभ शुक्र वृषभ, तुला या मीन राशि के पहले भाव में विराजमान हों, तो शुक्र दोष उत्पन्न होता है। जिससे नौकरी-व्यवसाय में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

-कुंडली में शुभ शुक्र पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव पड़ने से भी नकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

-कुंडली में मालव्य राजयोग के साथ मांगलिक दोष, पितृ दोष या कालसर्प दोष बनने से भी इस योग का शुभ प्रभाव कम होता है। जिससे व्यक्ति का अनैतिक कार्यों में मन ज्यादा लगता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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