Makar Sankranti - मकर संक्रांति : दान का पर्व, हजार गुना पुण्य DA Image

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मकर संक्रांति : दान का पर्व, हजार गुना पुण्य

मकर संक्रांति को साल के शुरुआत में आने वाला सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। इस पर्व को दान का पर्व कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान, पूजा करने से पुण्य हजार गुना हो जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे। इसी दिन से दिन बढ़ना और रात छोटी होनी शुरू हो जाती है। इस दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत भी मानी जाती है।  

इस दिन को सुख और समृद्धि का माना जाता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं। राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था, इसलिए मकर संक्रांति पर गंगासागर में मेला लगता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। धरती का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। छह माह सूर्य उत्तरायण रहते हैं और छह माह दक्षिणायण। हिन्दू धर्म में माना जाता है कि मकर संक्रांति से देवताओं का दिन आरंभ होता है, जो आषाढ़ मास तक रहता है। इसी दिन मलमास भी समाप्त होने तथा शुभ माह प्रारंभ होने के कारण लोग दान-पुण्य से शुरुआत करते हैं। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए इस समय को मकर संक्रांति कहा जाता है। दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी पर्व कहा जाता है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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