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Makar Sankranti 2019: आज है मकर संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र आदि सबकुछ

makar sankranti 2019

Makar Sankranti 2019: इस बार मकर संक्रांति का त्योहार आज यानि 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। आमतौर पर यह त्योहार हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन 2019 में सूर्य के मकर राशि में देर से जाने की वजह से ऐसा हो रहा है। मकर संक्रांति के दिन पूजा-पाठ और स्नान-दान का काफी महत्व होता है, जिससे शुभ फल की प्राप्ति होती है। आइए आपको इस मकर संक्रांति की शुरुआत, शुभ मुहूर्त, मंत्र, पूजा विधि आदि सभी चीज के बारे में बताते हैं।

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मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त-
संक्रांति आरंभ- 14 जनवरी 2019 रात्रि 20:05 से
पुण्य काल मुहूर्त - 07:14 से 12:36 तक (15 जनवरी 2019)
महापुण्य काल मुहूर्त - 07:14 से 09:01 तक (15 जनवरी 2019 को)

मकर संक्रांति पूजा विधि-
मकर संक्रांति के दिन सुबह किसी नदी, तालाब शुद्ध जलाशय में स्नान करें। इसके बाद नए या साफ वस्त्र पहनकर सूर्य देवता की पूजा करें। चाहें तो पास के मंदिर में भी जा सकते हैं। इसके बाद ब्राह्मणों, गरीबों को दान करें। इस दिन दान में आटा, दाल, चावल, खिचड़ी और तिल के लड्डू विशेष रूप से लोगों को दिए जाते हैं। इसके बाद घर में प्रसाद ग्रहण करने से पहले आग में थोड़ी सा गुड़ और तिल डालें और अग्नि देवता को प्रणाम करें।

मकर संक्रांति पूजा मंत्र
ऊं सूर्याय नम: ऊं आदित्याय नम: ऊं सप्तार्चिषे नम:

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
इस बार मकर संक्रांति पर सर्वार्थसिद्धि योग भी बन रहा है। 14 जनवरी 2019 की रात को 8:08 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जो मंगलवार को 15 जनवरी दोपहर 12 बजे तक इसमें रहेंगे। इसलिए 15 जनवरी 2019 को दोपहर 12 बजे से पूर्व ही स्नान-दान का शुभ मुहूर्त है। मकर संक्रांति पर स्नान और दान का विशेष योग मंगलवार को बन रहा है।

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मकर संक्रांति का महत्व
आज के दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में आ जाते हैं। उत्तरायण में सूर्य रहने के समय को शुभ समय माना जाता है और मांगलिक कार्य आसानी से किए जाते हैं। चूंकि पृथ्वी दो गोलार्धों में बंटी हुई है ऐसे में जब सूर्य का झुकाव दाक्षिणी गोलार्ध की ओर होता है तो इस स्थिति को दक्षिणायन कहते हैं और सूर्य जब उत्तरी गोलार्ध की ओर झुका होता है तो सूर्य की इस स्थिति को उत्तरायण कहते हैं। इसके साथ ही 12 राशियां होती हैं जिनमें सूर्य पूरे साल एक-एक माह के लिए रहते हैं। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे मकर संक्रांति कहते हैं।

मकर संक्रांति पर खिचड़ी का महत्व
मकर संक्रांति को खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने खास होता है। इसी वजह से इसे कई जगहों पर खिचड़ी भी कहा जाता है। मान्यता है कि चावल को चंद्रमा का प्रतीक मानते हैं, काली उड़द की दाल को शनि का और हरी सब्जियां बुध का प्रतीक होती हैं। कहते हैं मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने से कुंडली में ग्रहों की स्थिती मजबूत होती है। इसलिए इस मौके पर चावल, काली दाल, नमक, हल्दी, मटर और सब्जियां डालकर खिचड़ी बनाई जाती है।

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