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25 मार्च, 2020|3:08|IST

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Mahashivratri 2020: शिवरात्रि पर भगवान शिव की आराधना से शनि, गुरु, शुक्र के दोषों से मिलेगी मुक्ति

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इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग इसे महत्वपूर्ण बना रहा है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार 21 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।

ये रहेगा मुहूर्त
माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं, इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि भी कहा गया है। महाशिवरात्रि को की गई पूजा-अर्चना, जप दान आदि का फल कई गुना होता है।

शिव आराधना से होंगे कष्ट दूर
मवाना शुगर मिल के राधा-कृष्णा मंदिर के पुजारी प्रेम वल्लभ उत्प्रेती ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है। इस साल महाविशरात्रि पर शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। यह एक दुर्लभ योग है, जब ये दोनों बड़े ग्रह महाशिवरात्रि पर इस स्थिति में रहेंगे। बताया कि इससे पहले ऐसी स्थिति वर्ष 1903 में बनी थी। इस योग में भगवान शिव की आराधना करने पर शनि, गुरु, शुक्र के दोषों से मुक्ति मिल सकती है।

इस बार यह है विशेष
ज्योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत कहते हैं कि वैसे तो महाशिवरात्रि एक सिद्ध दिन और महापर्व होता ही है पर इस बार महाशिवरात्रि पर पूरे दिन ‘सर्वार्थ सिद्धि' योग भी उपस्थित रहेगा और सर्वार्थ सिद्धि योग को सभी कार्यों की सफलता के लिए बहुत शुभ माना गया है। इससे इस बार महाशिवरात्रि के पर्व का महत्त्व कई गुना बढ़ गया है इसलिए महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के निमित्त की गयी पूजा अर्चना, दान, जप तप आदि कई गुना परिणाम देने वाले होंगे साथ ही इस दिन अपने सभी नवीन कार्यों का आरम्भ या सभी महत्वपूर्ण कार्य भी किये जा सकेंगे। कहा कि महादेव बहुत जल्द प्रसन्न होने वाले भगवान हैं।

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 कंकरखेड़ा के पंडित विनोद त्रिपाठी कहते हैं कि इस बार महाशिवरात्रि के दिन शाम 5 बजकर 21 मिनट पर त्रयोदशी समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू हो जाएगी। वास्तव में त्रयोदशी और चतुर्दशी का मेल होने पर ही महाशिवरात्रि का पुण्यकाल शुरू होता है। विष्णुलोक के संस्थापक ज्योतिषविद विष्णु शर्मा कहते हैं कि दोनों के संगम काल में शिव जलाभिषेक शाम 5.21 बजे किया जाए तो अत्यन्त श्रेष्ठ है। शिव का जलाभिषेक दूध, दही, शहद, घी, शर्बत, गंगाजल से किया जाता है। शिव भक्त यदि गले में रुद्राक्ष धारण करके जलाभिषेक व पूजन करें तो शिव की विशेष कृपा रहती है।

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  • Web Title:Mahashivratri 2020: Worshiping Lord Shiva on Shivaratri will liberate you from the Shani dev and Guru and Venus dosh