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1 जून, 2020|8:01|IST

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महाशिवरात्रि: शिवरात्रि में प्रात: एवं रात्रि में चार प्रहर शिव पूजन का है विशेष महत्व

sawan shivratri 2018

महाशिवरात्रि व्रत का पालन फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है। इस बार यह पावन पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा। इस बार महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। भगवान शिव कल्याण करने वाले औघरदानी कहलाते हैं। वह शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। 

ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल के अनुसार शिव पूजन में स्नान के उपरान्त शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, दही घृत, मधु, शर्करा (पंचामृत) गन्ने का रस चन्दन, अक्षत, पुष्प माला, बेल पत्र, भांग, धतूरा द्रव्यों से अभिषेक विशेष मनोकामनापूर्ति हेतु किया जाता है एवं ‘ऊं नम: शिवाय' का जाप करना चाहिए। एस. एस. नागपाल ने बताया कि शिवरात्रि में प्रात: एवं रात्रि में चार प्रहर शिव पूजन का विशेष महत्व है। 

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महाशिवरात्रि पर शिव अराधना से प्रत्येक क्षेत्र में विजय, रोग मुक्ति, अकाल मृत्यु से मुक्ति, गृहस्थ जीवन सुखमय, धन की प्राप्ति, विवाह बाधा निवारण, संतान सुख, शत्रु नाश, मोक्ष प्राप्ति और सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। सीतापुर रोड स्थित विधांयाचल देवी मन्दिर के ज्योतिषाचार्य आनन्द दुबे के अनुसार महाशिवरात्रि कालसर्पदोष, पितृदोष शान्ति का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। जिन व्यक्तियों को कालसर्पदोष है, उन्हें इस दोष की शान्ति इस दिन करनी चाहिए। 

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ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल ने बताया कि चार प्रहार की पूजा प्रारम्भ समय-प्रथम प्रहर सायंकाल 6.03, द्वितीय प्रहर रात्रि 09.11, तृतीय प्रहर मध्यरात्रि 12.18 से चतुर्थ प्रहर प्रात: 3.24 से प्रारम्भ होगा। निशिथ काल रात 11.53 से रात 12.43 तक। 

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  • Web Title:Mahashivaratri: know significance of Lord Shiva pooja in Shivratri in the morning and night