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Diwali Puja Vidhi : लक्ष्मी- गणेश के साथ ही करें धन के देवता की पूजा, धन- धान्य से भरेगा जीवन, नोट कर लें सबसे सरल पूजन- विधि

दिवाली (दीपावली) का त्योहार 12 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं।

Diwali Puja Vidhi : लक्ष्मी- गणेश के साथ ही करें धन के देवता की पूजा, धन- धान्य से भरेगा जीवन, नोट कर लें सबसे सरल पूजन- विधि
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 12 Nov 2023 07:42 PM
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रविवार 12 नवंबर को दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। लोगों ने महालक्ष्मी की पूजा के लिए घरों में मंदिरों को सजा दिया है। शुभ मुहूर्त में पूजा अर्चना की जाएगी। इस दिन प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी और गणेश के साथ कुबेर की पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी की पूजा के शुभ मुहूर्त के अनुसार शाम को की जाएगी। 12 नवंबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष दिन में 2:45 बजे तक चर्तुदशी रहेगी। दिवाली के दिन शुभ मुहर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है। साथ ही श्रीयंत्र की स्थापना भी की जाती है। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में सुख और समृद्धि आती है। पं.दिनेश पांडेय ने बताया कि पूजा को लेकर पहाड़ों में खासा उत्साह है। लोग खूब पूजा की सामाग्री की खरीद कर रहे हैं।

दिवाली पूजन सामग्री लिस्ट-

मां लक्ष्मी की प्रतिमा (कमल के पुष्प पर बैठी हुईं), गणेश जी की तस्वीर या प्रतिमा (गणपति जी की सूंड बांयी ओर होनी चाहिए), कमल का फूल, गुलाब का फूल, पान के पत्ते, रोली, सिंदूर, केसर, अक्षत (साबुत चावल), पूजा की सुपारी, फल, फूल मिष्ठान, दूध, दही, शहद, इत्र, गंगाजल, कलावा, धान का लावा(खील) बताशे, लक्ष्मी जी के समक्ष जलाने के लिए पीतल का दीपक, मिट्टी के दीपक, तेल, शुद्ध घी और रुई की बत्तियां, तांबे या पीतल का कलश, एक पानी वाला नारियल, चांदी के लक्ष्मी गणेश स्वरुप के सिक्के, साफ आटा, लाल या पीले रंग का कपड़ा आसन के लिए, चौकी और पूजा के लिए थाली।

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मां लक्ष्मी-गणेश पूजन विधि-

सबसे पहले पूजा का संकल्प लें।
श्रीगणेश, लक्ष्मी, सरस्वती जी के साथ कुबेर जी के सामने एक-एक करके सामग्री अर्पित करें।
इसके बाद देवी-देवताओं के सामने घी के दीए प्रवज्जलित करें।
ऊं श्रीं श्रीं हूं नम: का 11 बार या एक माला का जाप करें।
एकाक्षी नारियल या 11 कमलगट्टे पूजा स्थल पर रखें।
श्री यंत्र की पूजा करें और उत्तर दिशा में प्रतिष्ठापित करें।
देवी सूक्तम का पाठ करें

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