DA Image
12 मार्च, 2020|2:27|IST

अगली स्टोरी

महाशिवरात्रि 2020: 117 सालों बना ऐसा योग, जानें शिवरात्रि पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, शिव स्तुति मंत्र समेत सब कुछ

maha shivratri 2020  know shiva pooja vidhi shubh muhurat timings mantra shiv chalisa arti mahashivr

Maha Shivaratri 2020 Pooja vidhi shubh muhurat timings: महाशिवरात्रि का पावन पर्व आज श्रद्धा, उल्लास से मनाया जा रहा है। भगवान शिव के दर्शनों के लिए मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। शिवालयों में भोर से दर्शन, पूजन अभिषेक के लिए भक्तों की कतार लगी हुई हैं।  मंदिरों में हर-हर महादेव की गूंज से साथ भक्त भगवान शिव का आशीष प्राप्त कर रहे हैं। शिव उपासक शुभ मुहूर्त में शिवरात्रि के चारों पहर में अभिषेक पूजन करेंगे। इस बार शिव भक्तों को खास संयोग में अभिषेक का अवसर मिल रहा है। इस बार यह पर्व और भी अधिक खास है। 117 साल बाद शिवरात्रि पर शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में है। यह एक दुर्लभ योग है, जब यह दोनों बड़े ग्रह शिवरात्रि पर इस स्थिति में है। इससे पहले 25 फरवरी 1903 को ठीक ऐसा ही योग बना था और शिवरात्रि मनाई गई थी। 

आज महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ हैं। इस वजह से बुध-आदित्य योग बनेगा। इसके अलावा इस दिन सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य रहेंगे। इस वजह से सर्प योग भी बन रहा है। शिवरात्रि पर राहु मिथुन राशि में और केतु धनु राशि में रहेगा। शेष सभी ग्रह राहु-केतु के बीच रहेंगे। सूर्य और बुध कुंभ राशि में, शनि और चंद्र मकर राशि में, मंगल और गुरु धनु राशि में, शुक्र मीन राशि में रहेगा।

Maha Shivratri 2020 : शिवलिंंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये 5 चीजें, जानें क्या है कारण

महाशिवरात्रि की तिथि और शुभ मुहूर्त 
महाशिवरात्रि की तिथि: 21 फरवरी 2020, शिवयोग ने बढ़ाया महाशिवरात्रि का महात्म्य
महाशिवरात्रि आरंभ - 21 फरवरी शाम 05:22 बजे
महाशिवरात्रि समापन -22 फरवरी शाम 07:03 बजे
शिवयोग का आरंभ:  21 फरवरी 01:32 बजे
शिवयोग का समापन: 22 फरवरी 03: 31 बजे
महानिशीथ काल का आरंभ- 21 फरवरी रात्रि 12:09 बजे
महानिशीथ काल का समापन- 22 फरवरी रात्रि 01:02 बजे

महा शिवरात्रि पर शुक्रवार शाम 6:18 बजे प्रथम प्रहर की पूजा शुरू होगी, द्वितीय प्रहर की पूजा रात्रि 9:29 बजे से, तृतीय प्रहर की पूजा मध्यरात्रि 12:40 बजे से, चतुर्थ प्रहर की पूजा प्रातः 3:53 बजे से शनिवार 22 फरवरी 2020 के सूर्य उदयकाल 7:03 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव की आराधना से विशेष लाभ मिलेगा।

devotees pour milk on a shivling during maha shivratri

भगवान शिव की कृपा पाने के लिए राशि अनुसार करें इन मंत्रों का जाप

शिवरात्रि की पूजा विधि-
- शिव रात्रि के दिन सबसे पहले सुबह स्नान करके भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करवाएं। 
- उसके बाद भगवान शंकर को केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं।
- इस दिन पूरी रात दीपक जलाकर रखें। 
- भगवान शंकर को चंदन का तिलक लगाएं।
- तीन बेलपत्र, भांग धतूरा, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं। सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें।
 - पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।

शिव स्मरण के लिए
भक्त को चाहिए कि वह शिव स्तुति, शिव सहस्रनाम, शिव महिम्नस्तोत्र, शिव चालीसा, रुद्राष्टकम, शिव पुराण आदि का पाठ करना चाहिए। यदि उपक्त पाठ करने में किसी प्रकार की बाधा हो रही हो तो पंचाक्षरी मंत्र 'नम:शिवाय' का जप ही निरंतर करना चाहिए। महाशिवरात्रि में जागरण करना शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है। 

ऊं नम: शिवाय का जाप करें
महाशिवरात्रि पर पूरे दिन ऊं नम: शिवाय का जाप मन ही मन करते रहें। शिवरात्रि पर बेलपत्र, धतूरा, बेर अर्पित करने भगवान की कृपा मिलती है। कहा जाता है कि शिवरात्रि के दिन मिट्टी से बनाए गए शिवलिंग के पूजन का विशेष महत्व है। पूजा करने के बाद भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। पुष्प अर्पित करने के बाद आरती करें और भगवान की परिक्रमा करें। लेकिन परिक्रमा करते समय ध्यान रखें कि शिव की परिक्रमा सम्पूर्ण नहीं की जाती है। जिधर से चढ़ा हुआ जल निकलता है उस नाली का उलंघन नही किया जाना चाहिए। वहां से प्रदक्षिणा उल्टी की जाती है। इस दिन शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे भक्त भय से मुक्त हो जाता है: 

जानें कब है महाशिवरात्रि, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि भी जान लें

कैसे करें व्रत
पूरा दिन भगवान शिव के चरणों में भक्ति के साथ बिताना चाहिए। सुबह सबसे पहले  जल में काले तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भोले शंकर के शिवलिंग पर दूध, शहद से अभिषेक कराना चाहिए। अभिषेक करते समय ओम नम: शिवाय का जाप करना चाहिए।  इस व्रत करें तो ध्यान रखें कि चावल, आटा और दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर निराहार व्रत नहीं रख सकते तो इस दिन फ्रूट्स, चाय, दूध ले सकते हैं। शाम को कूट्टू के आटे से बनी पूड़ी, सिंगाड़े का आटा ले सकते हैं। इसके अलावा आलू और लौकी का हलवा भी ले सकते हैं। 

अगर आप पूरे दिन निराहार व्रत रखना चाहते हैं तो अगले दिन स्नान करके व्रत का पारण कर सकते हैं। इस बीच रात्रि में भोले शंकर का जागरण करना चाहिए। कहा जाता है कि शिवरात्रि में संपूर्ण रात्रि जागरण करने से महापुण्य फल की प्राप्ति होती है। 

आइए जानें शिव चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

॥चौपाई॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट ते मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥दोहा॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान। अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

राशियों के अनुसार पूजन, दान 
मेष : भगवान शिव को दूध, दही, धतूरा, लाल रंग का पुष्प चढ़ाएं।
वृषभ : स्फटिक शिवलिंग की पूजा करें। लाल गुलाब, चंदन और कुमकुम चढाएं।
मिथुन : गन्ने के रस से अभिषेक करें और लाल मसूर की दाल गरीबों को दान दें।
कर्क : भगवान शिव का अष्टगंध और हल्दी से अभिषेक करें।
सिंह : केवड़े का पुष्प और विल्वपत्र अर्पित करें।
कन्या : बेर, धतूरा, भांग, विल्वपत्र और शिव को चढ़ाएं।
तुला : जल में सात प्रकार के पुष्प डालकर अभिषेक करें।
वृश्चिक : जल में शहद और घी डालकर अभिषेक करना चाहिए। 
धनु : चंदन से भगवान शिव का अभिषेक करें और सूखे मेवे का भोग लगाएं।
मकर : जल में काला तिल मिलाकर अभिषेक करें। गरीबों को गेहूं दान दें। 
कुंभ : भगवान शिव को भांग अर्पित करें और काले व सफेद तिल से पूजा करें।
मीन : जल में चने की दाल डालकर अभिषेक करना चाहिए। 
 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Maha Shivratri 2020: know shiva pooja vidhi shubh muhurat timings mantra shiv chalisa arti Mahashivratri Images photos Messages pics