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Magh Purnima Vrat Katha : माघ पूर्णिमा पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, हर मनोकामना होगी पूरी

Magh Purnima Ki Vrat Katha : पंचांग के अनुसार, इस साल 24 फरवरी को माघ पूर्णिमा मनाया जा रहा है। माघी पूर्णिमा के दिन श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही उपवास रखा जाता है।

Magh Purnima Vrat Katha : माघ पूर्णिमा पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, हर मनोकामना होगी पूरी
Arti Tripathiलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 24 Feb 2024 05:55 AM
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Magh Purnima 2024 Vrat Katha : हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 24 फरवरी 2024 को माघी पूर्णिमा मनाई जाएगी। माघी पूर्णिमी के दिन पवित्र नदी में स्नान करने का बड़ा महत्व है। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन श्रीहरि विष्णु पवित्र नदियों में निवास करते हैं। इस शुभ दिन पर स्नान-दान के कार्यों से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। धन, सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए कुछ लोग माघी पूर्णिमा का व्रत भी रखते हैं। इस दिन व्रत का पुण्य फल प्राप्त करने के लिए व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। आइए जानते हैं माघी पूर्णिमा की व्रत कथा...

माघ पूर्णिमा की व्रत कथा : 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक नगर में धनेश्वर नाम का ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी का नाम रूपवती था। ब्राह्मण और उसकी पत्नी भिक्षा मांगकर अपने जीवन का गुजारा करते थे। दोनों का कोई संतान नहीं था। एक दिन उसकी पत्नी नगर में भिक्षा मांगने गई, लेकिन लोगों ने उसे बांझ कहकर भिक्षा देने से मना कर दिया। जिससे संतान न होने के कारण वे दोनों बहुत चिंतित रहने लगे। एक दिन किसी ने ब्राह्मण की पत्नी रूपवती को संतान प्राप्ति के लिए 16 दिनों तक मां काली की पूजा करने को कहा। ब्राह्मण दंपत्ति ने विधि-विधान से 16 दिनों तक मां काली का पूजन किया। जिससे प्रसन्न होकर मां काली प्रकट हुई और ब्राह्मण की पत्नी को संतान-सुख प्राप्ति का वरदान दिया। साथ ही मां काली ने ब्राह्मण दंपत्ति से हर पूर्णिमा को एक दीपक जलाने को हर पूर्णिमा पर दीपक की संख्या बढ़ाने और पूर्णिमा व्रत रखने को कहा।

मां महाकाली के कहे अनुसार, ब्राह्मण दंपत्ति ने पूर्णिमा व्रत रखना और दीपक जलाना शुरू किया। कुछ ही दिन बाद ब्राह्मणी गर्भवती हो गई। मां काली की कृपा से ब्राह्मण और उसकी पत्नी के घर एक पुत्र ने जन्म लिया। दोनों ने अपने पुत्र का नाम देवदास रखा था, लेकिन देवदास की ज्यादा उम्र नहीं थी। देवदास बड़ा होकर अपने मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी चला गया। वहां ऐसी दुर्घटना घटी कि धोखे से उसका विवाह हो गया। कुछ समय बाद काल उसके प्राण लेने आया, लेकिन संयोग से उस दिन पूर्णिमा थी और ब्राह्मण दंपत्ति ने पुत्र के लिए व्रत रखा था। जिसके चलते काल उसका कुछ बिगाड़ा नहीं पाया। तभी से पूर्णिमा का दिन व्रत रखना बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे जीवन के सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और हर मनोकामना पूरी होती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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