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Maa Kushmanda Aarti : नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की करें आरती, हर मनोकामना होगी पूरी

Maa Kushmanda: नवरात्र की चतुर्थी तिथि पर देवी के कूष्मांडा स्वरूप का दर्शन-पूजन करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार अपनी मंद मुस्कान से पिंड से ब्रह्मांड तक का सृजन देवी ने इसी स्वरूप में किया था।

Maa Kushmanda Aarti : नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की करें आरती, हर मनोकामना होगी पूरी
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीFri, 12 Apr 2024 08:30 AM
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Navratri 4th Day Maa Kushmanda Ki Aarti : नवरात्र की चतुर्थी तिथि पर देवी के कूष्मांडा स्वरूप का दर्शन-पूजन करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार अपनी मंद मुस्कान से पिंड से ब्रह्मांड तक का सृजन देवी ने इसी स्वरूप में किया था। कूष्मांडा स्वरूप के दर्शन पूजन से न सिर्फ रोग-शोक दूर होता है अपितु यश, बल और धन में भी वृद्धि होती है। काशी में देवी के प्रकट होने की कथा राजा सुबाहु से जुड़ी है। देवी कूष्मांडा का मंदिर दुर्गाकुंड क्षेत्र में स्थित है। इन्हें दुर्गाकुंड वाली दुर्गा के नाम से भी जाना जाता है। मां कूष्मांडा अपने भक्तों के कष्ट और रोग का नाश करती है। नवरात्र के चतुर्थ दिन उपासक का मन अनाहत चक्र में उपस्थित रहता है। प्रात: काल स्‍नान से निवृत्त होने के बाद मां कूष्‍मांडा को लाल रंग का पुष्‍प, गुड़हल या फिर गुलाब अर्पित करें। मां को सिंदूर, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। मां की पूजा करते वक्त हरे रंग के वस्‍त्र धारण करें। मां को दही और हलवे का भोग लगाया जाता है। मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों को सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मां कूष्मांडा की पूजा उपासना करने से भक्तों को सभी सिद्धियां मिलती हैं। मान्यता है कि मां की पूजा करने से व्यक्ति के आयु और यश में बढ़ोतरी होती है। मां की कृपा से हर मनोकामना पूरी हो जाती हैं। नवरात्रि के चौथे दिन पर देवी कूष्मांडा का आशीर्वाद पाने के लिए विधिवत पूजा करने के साथ कूष्मांडा माता की आरती जरूर करें।

Navratri 4th Day : नवरात्रि के चौथे दिन होती है माता कूष्मांडा की पूजा, नोट कर लें पूजा-विधि, मंत्र, भोग, रंग और आरती

माता कूष्मांडा आरती-
चौथा जब नवरात्र हो, कूष्मांडा को ध्याते।
जिसने रचा ब्रह्मांड यह, पूजन है उनका
आद्य शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।
इस शक्ति के तेज से कहीं छांव कहीं धूप॥

कुम्हड़े की बलि करती है तांत्रिक से स्वीकार।
पेठे से भी रीझती सात्विक करें विचार॥

क्रोधित जब हो जाए यह उल्टा करे व्यवहार।
उसको रखती दूर मां, पीड़ा देती अपार॥
सूर्य चंद्र की रोशनी यह जग में फैलाए।
शरणागत की मैं आया तू ही राह दिखाए॥

नवरात्रों की मां कृपा कर दो मां
नवरात्रों की मां कृपा करदो मां॥

जय मां कूष्मांडा मैया।

जय मां कूष्मांडा मैया॥