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Rahu gochar: चंद्र ग्रहण के बाद राहु का गोचर मेष राशि में गोचर, ज्योतिर्विद ने बताए हैं, मेष राशि पर राहु का गोचर के परिणाम

Rahu gochar after chandra grahan: राहु गोचर का चराचर जगत सहित सभी राशियों एवं लग्नों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। यहां पर हम मेष लग्न पर विचार करेंगे की मेष लग्न के लोगों को किस प्रकार से प्रभावित करेगा।

Rahu gochar: चंद्र ग्रहण के बाद राहु का गोचर मेष राशि में गोचर, ज्योतिर्विद ने बताए हैं, मेष राशि पर राहु का गोचर के परिणाम
Anuradha Pandeyज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी,नई दिल्लीFri, 20 Oct 2023 12:21 AM
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Rahu Gochar 2023 October: चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर को लग रहा है, यह ग्रहण माना जाएगा और इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य होगा। इस चंद्र ग्रहण के बाद राहु राशि परिवर्तन कर रहे हैं। यहां हम आपको मेष राशि पर इस गोचर के प्रभाव के बारे में बताएंगे।छाया ग्रहों के नाम से अति प्रसिद्ध राहु एवं केतु का गोचरीय दृष्टिकोण से परिवर्तन कार्तिक कृष्ण पक्ष द्वितीया थे 30 अक्टूबर 2023 दिन सोमवार को होने जा रहा है। राहु एवं केतु , शनि के बाद एक राशि में सर्वाधिक कल तक गोचर करने वाले ग्रह हैं। अपने इस गोचरीय परिवर्तन के साथ दौरान राहु रेवती, उत्तरा भाद्रपद तथा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र पर संचरण करेगा अर्थात राहु बृहस्पति, शनि तथा मंगल के नक्षत्र पर गोचर करेगा। यह सभी नक्षत्र मीन राशि की नक्षत्र माने जाते हैं। मीन राशि जल तत्व की राशि मानी जाती है । इसी प्रकार केतु, चित्रा नक्षत्र के दो चरण, हस्त नक्षत्र के चारों चरण तथा उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के तीन चरणों की यात्रा के दौरान मंगल, चंद्र, बुध तथा शुक्र के नक्षत्र पर गोचर करेगा। परिणाम स्वरूप अपने मूल स्वभाव में नक्षत्र परिवर्तन के दौरान परिवर्तित करता रहेगा।

मेष लग्न में राहु का परिवर्तन लग्न भाव से व्यय भाव में तथा केतु का परिवर्तन सप्तम भाव से षष्ट भाव में वक्री गति से हो रहा है। मीन राशि में राहु एवं कन्या राशि केतु गोचर करते हुए अपने दृष्टि प्रभाव से भी व्यापक प्रभाव स्थापित करेंगे। गोचर एवं दृष्टि प्रभाव से राहु एवं केतु मेष लग्न वालों के लिए खर्च वृद्धि कराने वाले हैं। घर से दूरी बनाने की बनाने की संभावना बनेगी। यात्रा खर्च में वृद्धि की स्थिति बनेगी। व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी दूरस्थ यात्रा का योग बनेगा । वाणी की तीव्रता में वृद्धि की स्थिति बनेगी। पारिवारिक कार्यों को लेकर खर्च एवं चिंता में वृद्धि हो सकती है । मित्रों एवं परिजनों के शुभ कार्यों पर धन खर्च हो सकता है। दांत एवं गले की समस्या के कारण तनाव होगा। पेट की आंतरिक समस्या के कारण तनाव हो सकता है। गाल ब्लैडर की पथरी, पैंक्रियाज में सूजन, अपेंडिक्स सहित अन्य समस्या भी तनाव दे सकती है। पैर  में चोट अथवा दर्द की समस्या से भी तनाव उत्पन्न हो सकता है। ऋण की हड्डी में किसी न किसी रूप से कष्ट उत्पन्न हो सकता है।

सुख एवं सुख के संसाधनों पर खर्च होगा। इस अवधि में नींद में कमी महसूस हो सकती है । गृह एवं वाहन सुख पर खर्च वृद्धि के साथ परिवर्तन हो सकता है। प्रतियोगिता में विजय की स्थिति बनेगी। पुराने रोग, कर्ज एवं शत्रु पर विजय प्रताप का योग बनेगा परंतु नए कर्ज की स्थिति भी बनेगा । माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता तथा माता के साथ व्यवहार में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आय के संसाधनों में परिवर्तन का योग बनेंगे तथा सिर की समस्या से भी तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकता है। इस गोचरीय परिवर्तन के दौरान आचरण से गलत लोगों के साथ मित्रता हो सकती है तथा अच्छे लोगों से शत्रुता की भी स्थिति बन सकती है । वस्तुओं एवं वाहन की चोरी भी हो सकता है। अतः सावधान रहें। इसी दौरान यदि किसी व्यक्ति की राहु की महादशा अंतर्दशा अथवा प्रत्यंतर दशा चल रही है तो राहु का यह गोचर निश्चित तौर पर घातक परिणाम उत्पन्न कर सकता है। अतः सावधान रहें तथा कठोर एवं बड़े निर्णय से जरूर बचें। धार्मिक कार्यों पर खर्च करके तथा स्वयं में धैर्य रख कर राहु की पूजा कर करके अर्थात शांति कराकर ही राहु के प्रभाव से मुक्ति पाई जा सकती है।

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