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ऐसे आरंभ हुई गणपति विसर्जन की परंपरा

घर-घर विराजे भगवान श्रीगणेश की विदाई का समय आ रहा है। भगवान गणपति को भक्त उसी तरह विदा करते हैं जैसा घर का सबसे प्रिय व्यक्ति जब यात्रा पर जाता है और उसकी विदाई की जाती है। मार्ग में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है।

मान्यता है कि चतुर्थी के दिन महर्षि वेदव्‍यास ने भगवान श्रीगणेश को महाभारत की कथा सुनानी शुरू की थी। महर्षि वेदव्‍यास लगातार 10 दिनों तक उन्हें यह कथा सुनाते रहे। भगवान श्रीगणेश महाभारत की कथा लिखते रहे। आखिर में जब कथा पूरी हुई और महर्षि वेदव्‍यास ने आंखें खोली तो भगवान श्रीगणेश का तापमान काफी बढ़ गया था। महर्षि वेदव्‍यास ने उनका तापमान कम करने के उद्देश्य से भगवान श्रीगणेश को सरोवर में ले जाकर स्‍नान कराया। इस दिन अनंत चतुर्दशी थी और तब से ही गणपति प्रतिमा का विसर्जन करने की परंपरा आरंभ हुई। महाराज छत्रपति शिवाजी ने सार्वजनिक तौर से गणेश पूजन शुरू किया था। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने फिर इस उत्सव की शुरुआत की। भगवान श्रीगणेश जल तत्‍व के अधिपति हैं और यही कारण है कि अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति की पूजा-अर्चना कर गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Lord Shri Ganesh
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